ऐसे हालात होते तो मधुशाला कभी नहीं लिखी जाती

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आजकल तो शराब पर राजनीति शुरू हो गई है। बीजेपी और उनके मंत्रियों पर शराबबंदी का नशा इस कदर छाया हुआ है की मत पूछिये। उठते-बैठते, सोते-जागते बस मदिरा बैन का राग अलाप रहे हैं। हाल ही में बीजेपी के एक मंत्री साहब ने तो मदिरा को जाति से जोड़ दिया। उनका कहना है कि सबसे ज्यादा शराब राजपूत और यादव पीते हैं। फिर क्या था जनाब राजपूतों और यादवों में ठन गयी कि कौन सबसे ज्यादा अंडे और टमाटर मंत्री जी के घर पर बरसायेगा।

अब तो इसमें विपक्ष भी कूद पड़ा है। खैर, अब ये तो मंत्री जी ही बता सकते हैं कि ये रिपोर्ट उनके पास कौन से गुप्तचर विभाग ने भेजी है कि राजपूत आर यादव ही सबसे ज्यादा शराब का सेवन करते हैं। इतना ही नहीं मंत्री जी ने तो शराबबंदी के लिए आंदोलन करने की भी ठान ली है। भाई आजकल तो राजनीति में ये एक मुद्दा बना गया है, सब यही कह रहे चलो भई इसी पर राजनीति करें। मंत्री जी ने शायद बिहार की शराबबंदी को अपने दिल से ले लिया है। राज्य में फैले भ्रष्टाचार, अनाचार, बेरोजगारी और विकास के मुद्दों को छोड़कर बोतलबंदी आजकल मुख्य मुद्दा बना हुआ है। बिहार की तर्ज पर यहां भी शराबबंदी के कानूनों पर विचार कर रहे हैं।

शराबबंदी पर इतना फोकस हो गया है कि जैसे अगर ये कार्य पूर्ण हो गया तो बस देश में रामराज्य लौट ही आना है, देश सोने की चिड़िया दोबारा बन जायेगा। अपराध खत्म हो जायेगा, पाकिस्तान प्यार से कश्मीर लौटा देगा। चीन हमारी हर बात सर छुककर मानेगा। केजरीवाल माफ़ी मांगना छोड़ देंगे। मंत्री जी शायद बिहार की हालत का अंदाजा नहीं लगा पाए हैं। बिहार में शराब को लेकर अब तक इतने कानून बन गए हैं जितने शराब के ब्रैंड नहीं हैं। लेकिन फिर भी उसी सत्ता में बैठे लोग आये दिन शराब के साथ पकड़े जाते हैं।

शराबबंदी का असर ऐसा है कि पीने वालों को जेल, पिलाने वालों को जेल अगर आपके पड़ोसी ने पी ली तो आपको जेल, घर में पी ली तो घरवालों को जेल…हालात ऐसे हैं कि अगर आपके पास हरिवंश राय बच्चन कि मधुशाला मिल जाए तो भी आपको हवालात में रात गुजारनी ही पड़ेगी। बच्चन साहब ने ये कविता लिखते वक़्त सोचा भी नहीं होगा एक दिन ऐसा आने वाला है। उनेक दिल को कितनी ठेस पहुँचती होगी। खैर, ये तो मजे की बात रही मुद्दा ये है की शराब एक गंभीर समस्या है लेकिन इससे बड़ी भी समस्याएं हैं जिनसे निपटा जाना ज्यादा जरुरी है। शराब को जाति या धर्म से जोड़ना गलत है। शराब एक विकार है जो किसी को बर्बाद करती है, इससे धर्म जाति का कोई लेना देना नहीं। इसलिए इन मुद्दों को उछाल कर किसी कि भावनाएं आहत मत कीजिये

 

 

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