जम्मू कश्मीर के आर्टिकल 35A पर 16 अगस्त तक सुनवाई टली, जानिए क्या है 35A

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नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को जम्मू कश्मीर में लागू भारतीय संविधान की अनुच्छेद 35A के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की। इस अनुच्छेद के तहत राज्य सरकार की ओर से आने वाली सरकारी नौकरी और जम्मू कश्मीर की संपत्ति खरीदने का हकदार सिर्फ राज्य का ही नागरिक है।

आर्टिकल 35A

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच से आग्रह करते हुए कहा है कि यह बेहद संवेदनशील और गंभीर विषय है। ऐसे में कोर्ट को इसके समाधान के लिए वर्तमान में कोई भी ऐसा अंतरिम आदेश नहीं देना चाहिए, जिससे प्रभाव प्रतिकूल आ सकता है।
जम्मू कश्मीर सरकार की ओर से वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को राज्य में स्थायी रुप से लागू कर इस मुद्दे का पहले से ही समाधान कर चुका है।

एक याचिकाकर्ता के वकील रणजीत कुमार ने गिनती की और कहा- ‘जम्मू-कश्मीर में यह एक आसमंजस्य की स्थिति है, क्योंकि पाकिस्तान के लोग कानून के तहत राज्य में आ सकते हैं और राज्य में बस सकते हैं लेकिन पीढ़ियों के लिए रहने वाले लोग भी सरकारी नौकरी नहीं ले सकते।’

दरअसल, इस मामले की सुनवाई पिछले साल ही होनी थी। लेकिन तभी केंद्र ने पूर्व आईबी निदेशक दिनेश्वर शर्मा को कश्मीर विवाद में अपना मध्यस्थ नियुक्त कर दिया। 30 अक्टूबर को सरकार ने कोर्ट से सुनवाई टालने के आग्रह किया। सरकार की तरफ से एटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस सुनवाई से शांति बहाली की प्रक्रिया में अड़चन पड़ सकती है। कोर्ट ने सरकार के अनुरोध को मानते हुए सुनवाई 3 महीने के लिए टालने के आदेश दिया। उसके बाद से आज ये मामला कोर्ट में लगा।

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