पत्थरबाजी के पीछे छिपे हैं पाक के नापाक इरादे, एनआईए की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आए दिन होने वाली पत्थरबाजी के बारे में नेशनल इन्वेशटीगेशन एजेंसी ने एक बड़ा खुलासा किया है। एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कश्मीर में होने वाली पत्थरबाजी अब एक उद्दोग का रुप ले चुका है। इस तरह की पत्थरबाजी के पीछे पाकिस्तान का बड़ा षड़यंत्र है। पाकिस्तान आतंकियों की मदद से जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करना चाहता है। इसके पीछे बड़े आतंकवादी संगठनों व उनके हुक्मरानो का हाथ है।

पत्थरबाजी नहीं है लॉ एण्ड आर्डर की समस्या

एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि घाटी में पत्थरबाजी लॉ एण्ड आर्डर से जुड़ी समस्या नहीं है। इसके पीछे पाक की बड़ी साजिश है। देश के भोले-भाले नौजवानों को बरगलाकर उन्हें सरकार के खिलाफ करने के लिए पाक इसके लिए फंडिग कर रहा है। जिसके तहत हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी और आतंकी हाफिज सईद व सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकी जम्मू-कश्मीर को देश से अलग करने की योजना बना रहे हैं।

एनआईए ने कहा कि हुर्रियत के काडर दुकानदारों, कारोबारियों और कश्मीर के लोगों से फंड इकट्ठा करते हैं, जिन्हें रुकुन कहते हैं। इसके अलावा ये यहां के सेब उत्पादकों को 5 से 10 लाख रुपए देने की धमकी भी देते हैं।
यह पेशेवर पत्थरबाज कश्मीर के मासूम लोगों को अपनी ढाल बनाकर सेना, सीआरपीएफ और पुलिस बल पर पत्थरबाजी करने के लिए मजबूर करते हैं। एनआईए ने कहा कि सुरक्षाबलों को मजबूरन पेशेवर पत्तथबाजों से निपटने के लिए कभी-कभी कड़ा रवैया अपनाना पड़ता है।

एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पत्थरबाजी के वक्त जो युवा पेलेट गन से घायल होते हैं उन्हें अलगाववादी अपने एजेंडे को हाइलाइट करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा इसकी ये घटनाएं पहले से तैयार की जाती है।
जिसमें विरोध-प्रदर्शन, हमले, सड़क जाम, सार्वजनिक परिवहन को बाधित करने, जुलूस या मार्च निकालने, बाजारों को बंद करने जैसी गतिविधियों को अंजाम देने की बात कही जाती है।

पत्थरबाजी की ये घटनाएं पूरी तरह से प्लान करके अंजाम तक पहुंचाई जाती हैं। अलगाववादी इस बात का पूरा हिसाब-किताब रखते हैं कि कब किस जगह कौन सी तारीख को पत्थरबाजी की घटना को अंजाम देना है।

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