पत्थरबाजी से जूझते कश्मीर के लिए मिसाल हैं ये युवा डॉ. शाह फैसल

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सग़ीर ए ख़ाकसार

Upsc 2009 के एग्जाम में टॉपर रहे कश्मीरी युवा डॉ शाह फैसल कश्मीरी युवाओं के एक आदर्श के रूप उभर कर सामने आए हैं। इस बार करीब एक दर्जन कश्मीरियों ने upsc का एग्जाम पास किया है। वैसे तो कश्मीर को दुनिया में “जन्नत”का मुकाम हासिल है। लेकिन फिलवक्त की सच्चाई यह है कि वह पिछले करीब बीस वर्षों से सबसे डेंजरस ज़ोन के रूप में जाना जाने लगा है।

अभी इन दर्जनों भर टॉपरों की पृष्ठ भूमि का पता तो नहीं चल सका है। लेकिन कश्मीर और कश्मीरियों के हालात खास कर युवाओं के किसी से छुपे नही है। वो किन हालात में कैसे रहते हैं। यह हम सब बखूबी जानते हैं। आतंकवादी समूह किसी भी हालत में यह नहीं चाहते कि युवा भारत की मुख्य धारा से जुड़े। उनका बस चले तो वो सभी युवाओं के हाथों में बंदूके थमा दें।

जहां तक डॉ शाह फैसल का सवाल है उन्होंने विषम परिस्थितियों में लंबे संघर्ष के बाद अपना मुकाम बनाने में कामयाबी हासिल की थी। बचपन मे ही अज्ञात बंदूक धारियों ने उनके पिता को मार डाला था। जब वो महज 9 साल के थे।लेकिन वो डिगे नहीं।उम्मीदें नहीं छोड़ी।संघर्ष का रास्ता चुना।

आज ये जो ताजा हवा का झोंका कश्मीर से आया है यह हम सबके लिए एक सुखद संदेश लेकर आया है।सरकार को कश्मीरी युवाओं के लिए खास तौर पर जो प्रतियोगी परीक्ष की तैयारी में जुटे हैं उन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।बिलाल मुईनुद्दीन भट्ट ने इस बार 10 वां रैंक हासिल किया है तो पिछली बार अतहर आमिर ने दूसरा रैंक हासिल किया था।

अंधेरे में एक उम्मीद की किरण फूटी है।रहनुमाओं के निकलने का सिलसिला शुरू हुआ है।उनकी बेबसी जैसे जैसे दूर होगी इन्शाल्लाह रहनुमाओं की फेहरिस्त लंबी होती जाएगी।कश्मीर और देश का मुस्तकबिल इन्शाल्लाह आगे और भी अच्छा होगा।

“बेबसी को शऊर तो आने दो

रहनुमा भी इसी से निकलेंगे…”।

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