सरकार का बड़ा बयान, जीएसटी के दायरे में आने के बाद भी सस्ता नहीं होगा पेट्रोल-डीजल

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नई दिल्ली। बीते दिनों पारित हुए आम बजट के दौरान पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में लाने की चर्चा जोरों पर थी। लोगों में ऐसी धारणा बनी हुई थी कि जीएसटी के दायरे में आने के बाद इनके दाम घट जाएंगे। सरकार ने साफ किया है कि जीएसटी का इन चीजों के दामों से कोई लेना-देना नहीं है।

अगर पेट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे में आ भी जाते हैं तो इनकी कीमतों में कोई कमी नहीं हो पाएगी। इसके अलावा सरकार ने कहा कि बजट का भी इससे कुछ लेना देना नहीं है। इसलिए बजट में इन चीजों को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार नहीं किया गया। यह एक अलग प्रक्रिया है।

केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अढ़िया ने दिया बयान

पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर चल रही सभी चर्चाओं पर विराम लगाते हुए केंद्रीय वित्त सचिव हसमुख अढ़िया ने बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर कितना टैक्‍स होना चहिए, ये नीतिगत मामला है। इसमें लोकनीति का ध्‍यान रखा जाता है कि लोग कम वाहनों का उपयोग करें। सरकार इस कारण के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम नहीं कर सकती।

यही कारण है कि सरकार पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने के बाद भी इनकी कीमतों में बहुत ज्‍यादा कमी नहीं कर सकती है। उन्होंने बताया कि आज डीलर को मुनाफा जोड़कर 38 रुपये 8 पैसे प्रति लीटर पेट्रोल पड़ता है। इस पर केंद्र सरकार 19.48 रुपये एक्साइज ड्यूटी लगाती है, और दिल्ली में राज्य सरकार 15.54 रुपये वैट लगाती है।

अगर ये दोनों टैक्स हटाकर सरकार जीएसटी की सर्वोच्च दर 28% भी लगा देती तो पेट्रोल पूरे देश में 48 रुपये 74 पैसे में मिलने लगता। उन्होंने कहा कि अगले साल मार्च-अप्रैल 2019 में जीएसटी से मिले राजस्‍व की स्थिति साफ हो जाएगी। इसके बाद सभी पहलुओं को देखते हुए पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी की दरें तय की जा सकती हैं।

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