प्री मेच्योर बेबी के लिए तैयार किया ऐप, अमेरिका से मिला सात करोड़ का पैकेज

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रुड़की। रुड़की के विदुर भटनागर (26) ने एक ऐसा ऐप तैयार किया है जिससे प्री मेच्योर बेबी को जन्म देने वाली मांओं के लिए आसानी हो सकेगी। प्री मेच्योर बेबी के लिए ऐप के जरिए अस्पताल के नियोनेटल इंटेनसिव केयर यूनिट (एनआइसीयू) में बच्चे को अपनी ही मां का दूध मिल सकेगा।

प्री मेच्योर बेबी

प्री मेच्योर बेबी के लिए ऐप के जरिए जल्द मिलेगा मां का दूध

इस ऐप का नाम ‘मॉम एंड नर्स’ है। इसके जरिए दूध की बोतल बदलने की आशंका कम होगी। अमेरिकी कंपनी कैरीटोन ने ब्रेस्ट मिल्क मैनेजमेंट स्टार्टअप के लिए उन्हें करीब सात करोड़ रुपये का पैकेज दिया है।

नोएडा के जेआइआइटी कॉलेज से बीटेक कर चुके विदुर अमेरिका की पैन यूनिवर्सिटी सें रोबोटिक्स इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे हैं। विदुर ने वहां से फ़ोन के जरिए बातचीत में कहा कि उन्होंने अगस्त 2015 में यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। सितंबर में यूनिवर्सिटी में पैन ऐप प्रतियोगिता हुई। जिसमे उन्होंने ये ऐप तैयार किया। जिससे पार्किंसन बीमारी के बारे आसानी से पता लगाया जा सकता था।

प्रतियोगिता में ऐप को द्वितीय पुरस्कार मिला। उन्होंने बताया कि इससे उन्हें प्रोत्साहन मिला। तब उन्होंने कुछ नया करने की ठानी।

विदुर ने बताया कि उनके भांजे का का जन्म प्री-मैच्योर हुआ था। तब उन्होंने देखा था कि एनआइसीयू में भर्ती भांजे को दूध पिलाने के लिए उनकी बहन को दिन में कई बार जाना पड़ता था। ये देखकर मई इसी पर कुछ काम करने की सोचने लगा। उसके बाद मैंने अमेरिका में प्री-मैच्योर बेबी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की, तो पता चला कि यहां हर साल करीब पांच लाख बच्चे समय से पहले जन्म लेते हैं, जिन्हें एनआइसीयू में रखा जाता है।

ऐसे बच्चों के लिए मां का दूध जरूरी है। इसलिए नर्सों को दिन में कई बार बोतल से इन्हें दूध पिलाना होता है। इसके लिए मां के दूध को पंप कर बोतल में भरने के बाद अस्पताल के फ्रीजर में रख दिया जाता है। जिसमें कई बार बोतल बदल जाती हैं। किसी और मां के दूध से बच्चे के बीमार होने की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए इस ऐप के जरिए बच्चे को अपनी ही मां का दूध आसानी से मिल सकेगा।

जिस बोतल में दूध होगा उस पर बार कोड लगाकर उसे ऐप से स्कैन किया जाएगा

इसमें जिस बोतल में दूध होगा। उस पर बार कोड लगाकर उसे ऐप से स्कैन किया जाता है। विदुर के अनुसार उनका ऐप अमेरिकी कंपनी कैरीटोन को काफी पसंद आया। अब वह विश्वविद्यालय से एक साल का अवकाश लेकर कंपनी के साथ ऐप पर कुछ और काम करेंगे। वह डोनर मिल्क और मिल्क बैंक ऐप भी बनाएंगे।

विदुर के पिता एसके भटनागर व्यापारी हैं और उनकी मां हाउसवाइफ। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। वे कहते हैं कि भारत में हर साल करीब 30 लाख बच्चे प्री-मैच्योर पैदा होते हैं। ऐसे में अपने देश में इस ऐप की जरूरत है।

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