अगर मैं मुजफ्फरनगर दंगे का दोषी हूं तो इस्तीफा देने को तैयार हूं

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लखनऊ। मुजफ्फरनगर दंगे का मामला जब विधानसभा में उठा तो सूबे  के नगर विकास मंत्री आजम खान भी खुलकर सामने आ गए। उन्होंने इस्तीफे की पेशकश कर दी। अपना इस्तीफा लेकर सदन पहुंचे आजम खान ने कहा कि सदन का एक भी सदस्य बताए अगर मैं दोषी हूं तो मैं इस्तीफे को तैयार हूं। मुजफ्फरनगर दंगे पर आजम खान को लेकर किए गए स्टिंग ऑपरेशन पर एक न्यूज चैनल के पत्रकारों की आज पेशी थी। इसी दरम्यमान आजम ने इस्तीफे की पेशकश कर दी।

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मुजफ्फरनगर दंगे पर स्टिंग ऑपरेशन: अब पत्रकारों की पेशी चार मार्च को

मुजफ्फरनगर दंगे की जांच रिपोर्ट में सामने आए फर्जी स्टिंग ऑपरेशन करने वाले प्राइवेट न्यूज़ चैनल के आरोपी पत्रकारों की शुक्रवार को विधानसभा में पेशी थी। जिसके लिए सदन में अलग से कटघरा भी बनवाया गया था लेकिन चैनल की तरफ से हाजिरी माफ़ी की अर्जी मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने आरोपी पत्रकारों को एक बार फिर से तलब किया है। अब सभी पत्रकारों को विधानसभा में चार मार्च को साढ़े बारह बजे पेश होना है। जब सदन में पत्रकारों के हाजिरी माफ़ी की चिट्ठी पढ़ी जा रही थी उस दौरान बीजेपी विधायकों ने उनको समन किये जाने का विरोध किया और सदन से वाक आउट कर गए। हालांकि सदन के अन्य सदस्यों ने पत्रकारों को तलब किये जाने पर अपनी सहमती जताई।

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जानिए ये है मामला

दरअसल, मुजफ़फरनगर दंगे की शुरुआत से पहले कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। उसी वक्त एक निजी न्यूज चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन में यूपी के मंत्री आजम खान के दबाव में कई सस्पेक्ट लोगों को छोड़े जाने और एफआईआर को बदले जाने की बातें सामने आई थी. स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया गया था कि दंगों के संदिग्धों को राजनीतिक दबाव के कारण छोड़ दिया गया था।  इतना ही नहीं अजम खान के प्रेशर के चलते ही तत्कालीन डीएम को संदिग्धों की तलाशी के कारण ट्रांसफर कर दिया गया था और एफआईआर भी बदली गई। स्टिंग ऑपरेशन में यह भी दिखाया गया कि आजम खान ने अफसरों को फोन कर हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के लिए कहा और यह भी कहा कि जो हो रहा है उसे होने दो।

विधानसभा में 350 पन्नों की जांच रिपोर्ट पेश की गई थी

सपा विधायक सतीश कुमार निगम की अध्यक्षता में सात मेंबरों की कमेटी ने मंगलवार को विधानसभा में 350 पन्नों की जांच रिपोर्ट पेश की। मुजफ्फरनगर दंगे की जांच रिपोर्ट में पैनल ने कहा कि 17-18 सितंबर 2013 को न्यूज चैनल का स्टिंग ऑपरेशन फर्जी था। स्टिंग ऑपरेशन के फर्जी होने की रिपोर्ट सामने आने के बाद निजी न्यूज चैनल के पत्रकारों को विधानसभा में तलब किया गया था। उनकी पेशी थी। जिसका विरोधी बीजेपी सदस्यों ने किया।

 

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