लाल किले के सौदे पर कठघरे में मोदी सरकार, बताया- इतिहास का सबसे काला दिन

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नई दिल्ली। डालमिया ग्रुप द्वारा हाल ही में लाल किले को गोद लिया गया है। सरकार ने 25 करोड़ रुपए में 5 सालों के रखरखाव के लिए इस ऐतिहासिक इमारत का सौदा डालमिया ग्रुप के साथ किया है। लाल किले का सौदा किए जाने को लेकर सियासत गर्मा चुकी है। कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा ऐसा करने पर अपना विरोध प्रकट किया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर देश की स्वतंत्रता के प्रतीकों को आभासी तौर पर कॉरपोरेट घराने को सौंपने का आरोप लगाया है। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने ट्वीट कर कहा है कि यह इतिहास का सबसे दुखद व काला दिन है।

सरकार ने दी मामले का सफाई
विपक्ष द्वारा कड़ी आलोचना झेलने के बाद सरकार ने इस मुद्दे पर सफाई दी है। पर्यटन राज्य मंत्री महेश शर्मा ने मामले पर बयान देते हुए कहा है कि लाल किला सहित कई ऐतिहासिक भवनों को संरक्षण और पर्यटकों को अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए निजी कंपनियों के साथ करार किया गया है। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों को मुनाफा कमाने की अनुमति नहीं दी गई है। इमारतों में होने वाली गतिविधियों से कमाए धन का इस्तेमाल इन्हीं इमारतों के संरक्षण पर खर्च किया जाएगा।

ममता बनर्जी ने बताया इतिहास का काला दिन
मामले पर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने ट्वीट किया कि मोदी सरकार हमारे ऐतिहासिक लाल किले की देखरेख क्यों नहीं कर सकती है? लाल किला हमारे राष्ट्र का प्रतीक है। यह वह जगह है, जहां स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा लहराया जाता है। इसको पट्टे पर क्यों दिया गया? यह हमारे इतिहास का दुखद और काला दिन है।

वहीं कांग्रेस पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर बीजेपी पर निशाना साधते हुए एक पोल पोस्ट किया है, जिसमें उसने लोगों की राय मांगी है कि बीजेपी अगली कौन सी ऐतिहासिक इमारत को लीज पर देगी। इस ट्वीट में कांग्रेस ने जो विकल्प दिये हैं उनमे पार्लियामेंट, लोक कल्याण मार्ग, सुप्रीम कोर्ट शामिल हैं।

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