शरीफ हुए नवाज तो पूरा पाकिस्‍तान ही हो गया खिलाफ, सेना को लग रहा ये डर

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नवाज शरीफइस्लामाबाद। मुंबई हमलों में पाकिस्तानी आतंकियों की भूमिका मानने वाले पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान से पाकिस्तानी सेना बेहद नाराज है। दरअसल पाकिस्तानी आर्मी को यह डर है कि शरीफ के बयान से भारत के इस दावे को भी मजबूती मिली है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर पलने और संचालित होनेवाले आतंकवाद के खात्मे के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

बता दें कि पाकिस्‍तानी अखबार ‘डॉन’ को दिए इंटरव्यू में नवाज शरीफ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से एक साक्षात्कार में माना था कि पाकिस्तान में आतंकी संगठन सक्रिय हैं। उन्होंने सरकार से इतर इन तत्वों के सीमा पार करने और लोगों की हत्या करने देने की पाकिस्तान की नीति पर सवाल उठाए थे। साथ ही नवाज ने कहा था कि आतंकी संगठन सक्रिय हैं, क्या उन्हें सीमा पार करने और मुंबई में 150 लोगों की हत्या करने की इजाजत दे देनी चाहिए?

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि सेना के उच्च अधिकारियों को इस बात की भी चिंता सता रही है है कि शरीफ का बयान पैरिस स्थित अंतर-सरकारी पाकिस्तान को फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ब्लैक लिस्ट में डालने के लिए काफी है। इस संगठन की स्थापना 1989 में G-7 देशों ने की थी ताकि मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए नीतियां बनाई जा सके। पाकिस्तान बीते 3 महीने से ग्रे लिस्ट में शामिल है।

सूत्रों की माने तो शरीफ पर उनकी सत्ताधारी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज और सेना दबाव बना रही है ताकि वह तुरंत प्रभाव से अपना बयान वापस लें या फिर स्पष्टीकरण दें।

हालांकि, अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि नवाज अपना बयान वापस लेंगे। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तानी आर्मी सोमवार को नवाज के मुंबई हमलों को लेकर दिए बयान पर उच्च स्तरीय बैठक करने जा रही है।

बता दें कि भारत लंबे समय से साल 2008 में हुए मुंबई हमलों के लिए पाकिस्तान से संचालित होनेवाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर आरोप लगाता रहा है। भारत सरकार के मुताबिक, ये हमलावर कराची से नाव पर सवार होकर भारत आए थे और मुंबई में कई जगह हमले किए थे।

26/11 हमले की सुनवाई पाकिस्तान की आतंरोधी अदालत में साल 2009 से चल रही है लेकिन अभी तक इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने बिना पूरी जांच किए ही मामला कोर्ट भेज दिए, जबकि पाकिस्तान नई दिल्ली पर पर्याप्त सबूत मुहैया न करवाने का आरोप लगाता रहता है।

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