सिसायतें हिल जाएंगी अगर सच्चाई पर आ जाऊं…

0

हर्षिता शुक्ला

चिराग जले थे मुल्क रोशन करने के लिए..अब मयस्सर एक घर भी उजाले को तरसता है

हां सहीं कह रही हूं मैं.. दूसरों की नहीं कम से कम खुद की आंखे खोल लो..स्वतंत्र हो.. और हां करीब से देखोगे तो खुद शर्म आ जाएगी, ये सियासत का वो आइना है जो दलदल में पड़ा है… धीरे-धीरे ये जो राजनीति नाम का दीमक है ना बढ़ता ही जा रहा है। सम्मान, सुरक्षा, बेटी बचाव जैसी चीज़ो पर बोलने वालों को तब होश नहीं रहता जब वह अपने इन शब्दों को भूल कर अपनी मर्यादा लांघ जाते हैं। ऐसे में जब भी महिलाओं पर अत्याचार की बात उठती है तब मर्द विधायक और नेता इन सब को वो गिरगिट वाले रंग दिखने लगते हैं। सरकार जनता के करोड़ों रुपये से बेटी बचाओं बेटी पढाओ अभियान के पोस्टर छपवाने में खर्च हो रहे हैं लेकिन सरकार अपनी नेताओं की मानसिकता बदलने में कामयाब नहीं हो पा रही है.

हमेशा देखा गया है कि सभी दलों के नेताओं के ऐसे बयान आते रहते हैं जिसके बाद लोगों में गुस्सा फूट पड़ता है उनकी आलोचना भी होती वो माफ़ी भी मांगते हैं लेकिन तब भी राजनीति के हालत नहीं बदलते. अभी हाल ही बात करें तो मध्य प्रदेश के देवास से बीजेपी नेता मनोहर उटवाल ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की पत्नी को आईटम कहा था.

वहीँ यूपी के एक भाजपा विधायक कहते हैं की कोई तीन बच्चों की मां के साथ कोई रेप कैसे कर सकता है ये बात  उन्हें समझ नहीं आती. नेता जी का यह बयान ऐसे वक़्त आया जब उनके ही नेता पर एक नाबालिग के साथ गैंग रेप का आरोप लगा है. कुछ नेता आरोपी नेता को बचाने के लिए सीबीआई जांच तक की मांग कर रहे हैं. ऐसे नेताओं को पार्टी से निकाला तक नहीं जाता है.

वही अब तमिलनाडु के एक भाजपा नेता ने तो हद ही पार कर दी है. उन्होंने फेसबुक पोस्ट कर लिखा है कि एक महिला पत्रकार न्यूज राइडर या रिपोर्टर तब तक नहीं बनती जबतक वो किसी बड़े नेता के साथ सो नहीं जाती. क्या यही है सरकार का बेटी बचाओ अभियान? क्या ऐसे ही देश की महिलाओं को समान सुरक्षा और अधिकार मिलेंगे.

क्या सरकार की नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती कि वो नेताओ के खिलाफ कार्रवाई ताकि जनता द्वारा चुनकर आये ये नेता महिलाओं से अदब और तमीज के साथ व्यवहार करना सीख जाए. क्या सिर्फ राजनीति सत्ता का उपभोग करने के लिए बनाई गई है.

इससे अलावा भी एक चौकाने वाली रिपोर्ट सामने ये है, जिसमे कहा गया है कि देश के 48 सांसद और विधायकों पर महिलाओें के खिलाफ अपराध के केस हैं। भाजपा में ऐसे नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा 12 है. तो सरकार कैसे बेटियों की सुरक्षा करती है ये तो वो ही बता सकती है.

loading...
शेयर करें