घोटालों से बचने के लिए RBI का नया फरमान, बैंकों के एलओयू जारी करने पर लगाया प्रतिबंध

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नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (पिएनबी) में हुए 11,400 करोड़ के हुए घोटाले से सबक लेते हुए (आरबीआई) ने एक बड़ी फैसला लिया है। आरबीआई ने देश के सभी बैंकों पर आयत के लिए लेटर ऑफ़ अंडर अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी करने के लिए रोक लगा दी है। इसके अलावा लेटर ऑफ क्रेडिट और बैंक गारंटी भी कुछ शर्तों के साथ ही दी जा सकेगी।

rbiरिजर्व बैंक द्वारा मंगलवार को जारी एक अधिसूचना के मुताबिक, आयात के लिए ट्रेड क्रेडिट के तौर पर कोई भी वाणिज्यिक बैंक एलओयू और एलओसी जारी नहीं कर पाएगा। इस सुविधा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। जानकारों के अनुसार रिजर्व बैंक के इस कदम से कई कारोबारियों को दिक्कत हो सकती है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल के मुताबिक बैंक के इस कदम से छोटे ज्वैलरों पर असर होगा।

क्या है एलओयू?
लेटर ऑफ अंडरटेकिंग एक तरह की बैंक गारंटी होती है जो ओवरसीज इंपोर्ट पेमेंट के लिए जारी की जाती है। सीधे शब्दों में इसका अर्थ होता है कि अगर लोन लेने वाला (नीरव मोदी) इस लोन को नहीं चुकाता है तो बैंक पूरी रकम ब्याज समेत बिना शर्त चुकाता है। बैंक एक निश्चित समय के लिए जारी करता है। बाद में जिसको ये एलओयू जारी किया गया उससे पूरा पैसा वसूला जाता है। एलओयू को आधार बनाकर नीरव मोदी ने विदेश में दूसरी बैंकों की ब्रांच से पैसा लिया।

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