7 केंद्रीय मंत्रियों सहित 41 निर्वाचित सदस्यों ने ली राज्यसभा की सदस्यता

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नई दिल्ली| राज्यसभा के लिए निर्वाचित सदस्यों ने मंगलवार को छह साल के अपने कार्यकाल के पहले दिन शपथ ग्रहण की। निर्वाचित सदस्यों में सात सदस्य केंद्रीय मंत्री हैं, जबकि 18 सदस्य दोबारा निर्वाचित हुए हैं। सभापति एम. वेंकैया नायडू ने नवनिर्वाचित सदस्यों का स्वागत करते हुए पहली बार निर्वाचित सदस्यों को सदन के शिष्टाचार, आचरण और प्रक्रियाओं से जल्द परिचित हो जाने के लिए कहा।

राज्यसभा में शपथ लेने वालों में सीएम रमेश, के. रविंद्र कुमार, मनोज कुमार झा, अहमद अशफाक करीम, महेंद्र प्रसाद, रविशंकर प्रसाद, अखिलेश प्रसाद, बशिष्ठ नारायण सिंह, सरोज पांडे, मनसुख एल. मंडाविया, नरनभाई राठवा, परषोत्तम रूपाला, एमी हर्षाद्रे याग्निक, देवेंद्र पॉल वत्स, जगत प्रकाश नड्डा, राजीव चंद्रशेखर, थावरचंद गहलोत शामिल थे।

इनके अलावा राजमणि पटेल, धर्मेन्द्र प्रधान, अजय प्रताप सिंह, कैलाश सोनी, वंदना चव्हण, अनिल देसाई, प्रकाश जावड़ेकर, केशव चिंतामन केतकर, वी. मुरलीधरन, नारायण राणे, अनिल अग्रवाल, अशोक बाजपेयी, अनिल कुमार जैन, कांता कर्दम, जी.वी.एल. नरसिंहाराव, सकलदीप, विजय पाल सिंह तोमर, हरनाथ सिंह यादव, अनिल बलूनी, अबीर रंजन विश्वास, सुभाशीष चक्रवर्ती, एम. नदीमुल हक, शांतनु सेन और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली।

पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वेंकैया नायडू की अनुमति से सरोज पांडे ने अपनी सीट पर ही शपथ ली।

राज्यसभा के सभापति ने नवनिर्वाचित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि सदन और अपनी तरफ से, मैं नवनिर्वाचित और दोबारा निर्वाचित हुए सदस्यों का हार्दिक स्वागत करता हूं। उन्होंने कहा कि दोबारा निर्वाचित हुए सदस्य यहां के नियमों, प्रक्रियाओं, प्रथाओं और बारीकियों से परिचित हैं और नए सदस्य भी शिष्टाचार, आचरण और प्रक्रियाओं से जल्द परिचित हो जाएंगे। इसके अलावा वे वरिष्ठ सदस्यों के अनुभवों से भी सीख सकते हैं।

वेंकैया नायडू ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि सभी सदस्य राज्यसभा की गरिमा और प्रतिष्ठा को बढ़ाने का प्रयास करेंगे, जिससे संसदीय संस्था और मजबूत हो सके। कुछ दिनों में और सदस्य भी सदन की सदस्यता ग्रहण करेंगे।

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव और उससे पनपे आक्रोश पर राज्यसभा के सभापति ने कहा कि अगर देश के दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और कमजोरों पर हमला होगा, तो अंजाम बुरा होगा। उन्होंने कहा कि आखिर क्या वजह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार आते ही देशभर में दलितों और अल्पसंख्यकों पर हम हमले तेज हो गए? जब यही सब करना है तो ‘सबका साथ सबका विकास’ कहकर देश को भरमाना कहां तक उचित है।

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