आखिर जेल में बंद कैदी कैसे हो रहे हैं एड्स का शिकार, मानवाधिकार आयोग ने मांगा योगी सरकार से जवाब

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गोरखपुर। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में दो दर्जन कैदियों के एचआइवी पॉजिटिव मिलने से हड़कंप मच गया है। इन कैदियों में एक महिला भी शामिल है। इससे पहले उन्नाव में भी करीब चार दर्जन कैदी एड्स से संक्रमित पाए जा चुके हैं। कैदियों के इस तरह की बीमारी से संक्रमित होने को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने योगी सरकार को नोटिस भेजकर उनसे जवाब मांगा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जारी की विज्ञप्ति

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में इस संबंध में कहा गया है कि अगर मीडिया खबर सही है तो उत्तर प्रदेश की जेलों की बदहाली के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। कैदियों में एचआईवी संक्रमण कैसे फैला, इसकी वजह का पता लगाने के लिए तत्काल जांच की आवश्यकता है। इसके साथ ही एहतियात के तौर पर तत्काल उपाय भी जरूरी है। जिससे अन्य कैदी एचआईवी से संक्रमित न होने पाएं। संक्रमित कैदियों को आवश्यक चिकित्सकीय उपचार मुहैया कराई जाए।

आपको बताते चले कि 28 फरवरी को आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जेल प्रशासन ने दावा किया है कि बीमारी जेल के भीतर नहीं फैली। कैदी जब जेल में आए थे तभी संक्रमण के शिकार थे। उनमें से अधिकांश मादक पदार्थों से जुड़े कानून के तहत जेल की सजा काट रहे थे।

उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की पहल पर पिछले साल अक्टूबर में एचआईवी का पता लगाने के लिए कैदिया का ब्लड टेस्ट कराया गया था। जिसमें एक महिला के साथ 24 कैदी के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी।
गोरखपुर जिला जेल में एचआईवी पॉजिटिव मिलने से जेल प्रशासन और कैदियों में खलबली मच गई।

आईजी जेल के निर्देश पर जिला कारागार गोरखपुर में 1500 कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था। जिसमें 24 में एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। जेल में बंद विचाराधीन कैदियों में ही सबसे ज्यादा एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे।

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