देश भर में महाशिवरात्रि की धूम, मंदिरों में भक्तों की उमड़ी भीड़, ऐसे करें भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न

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नई दिल्ली। बाबा भोलेनाथ की उपासना का सबसे बड़ा दिन महाशिवरात्रि का पर्व आज देशभर में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गई है। भक्त आज भगवान को प्रसन्न करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। प्राचीन भारतीय परंपरा में फाल्गुन मास की चतुर्दशी के दिन यह पर्व मनाया जाता है। वैसे इस बार शिवरात्रि दो दिन मनाई जा रही है।  महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। मान्यता है कि आज ही के दिन भगवान शिव का देवी पार्वती के साथ विवाह हुआ था। शिव का अर्थ है कल्याणकारी। भगवन शिव को कई नामों से जाना जाता है। जैसे बाबा भोलेनाथ, शिवशंकर, शिवशम्भू, शिवजी, नीलकंठ और रूद्र आदि नाम शामिल है। शिव देवों के देव महादेव कहे गए हैं। सभी प्रकार के पापों का नाश करने और समस्त सुखों की कामना के लिए महाशिवरात्रि व्रत करना श्रेष्ठ है।

दो दिन मानेगी शिवरात्रि 

इस बार भक्त शिवरात्रि का पर्व दो दिन मनायेगे। 13 जनवरी को पूरे दिन त्रयोदशी तिथि है और मध्यरात्रि में 11 बजकर 35 मिनट से चतुर्दशी तिथि लग रही है। ऐसे में महाशिवरात्रि आज भी मनाई जा रही है और कल भी मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिवमंदिरों में कतारें लग जाती हैं। शिव के 12 ज्योर्तिलिंग हैं। महाशिवरात्रि पर इनके दर्शन शुभ माने जाते हैं। श्रद्धालु जल से और दूध से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। शिवलिंग का अभिषेक कराने के बाद श्रद्धालु चंदन लगाकर फूल, बेलपत्र अर्पित करते हैं।

कहा जाता है कि आज के दिन सच्चे man से भगवन शिव की आराधना करने वाले की har मुराद पूरी होती है। आज के दिन अपनी गलतियों की माफ़ी मांगने का सबसे अच्छा दिन माना जाता है।

व्रत की महिमा

आज के दिन भक्त व्रत रखते हैं। जो भी सच्चे मन से भगवन का व्रत और पूजन करता है। उसे इस लोक में अनंत सुख प्राप्त होता है साथ ही मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।   

इस व्रत के विषय में मान्यता है कि जो व्रत करता करता है, उसे सभी भोगों की प्राप्ति के बाद, इस व्रत को लगातार 14 वर्षों तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका समापन करना चाहिए।

भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय 

अब हम आपको बताते हैं कि भगवन शिव को अप कैसे प्रसन्न कर सकते हैं। आज के दिन ‘ॐ नमः शिवाय:’ पंचतत्वमक मंत्र है इसे शिव पंचक्षरी मंत्र कहते हैं। इस पंचक्षरी मंत्र से मनुष्य को सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है।  शिव का निरंतर चिंतन करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

व्रती दिनभर शिव मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय:’ का जाप करें तथा पूरा दिन निराहार रहें। रोगी, अशक्त और वृद्ध दिन में फलाहार लेकर रात्रि पूजा कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि

आज के दिन चरों पहर की पूजा का विधान है। आज के दिन भक्तों को शिवपुराण का पथ करना चाहिए।

श्री महाशिवरात्रि व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। स्नान, वस्त्र, धूप, पुष्प और फलों के अर्पण करें। इसलिए इस दिन उपवास करना अति उत्तम कर्म है।

रात के पहर में शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए।  प्रत्येक पहर की पूजा का सामान अलग से होना चाहिए।

भगवान शिव को दूध, दही, शहद, सफेद पुष्प, सफेद कमल पुष्पों के साथ ही भांग, धतूरा और बिल्व पत्र अति प्रिय हैं।

इन मंत्रों का जाप करें-

‘ओम नम: शिवाय ‘, ‘ओम सद्योजाताय नम:’, ‘ओम वामदेवाय नम:’, ‘ओम अघोराय नम:’, ‘ओम ईशानाय नम:’, ‘ओम तत्पुरुषाय नम:’।

अर्घ्य देने के लिए करें

‘गौरीवल्लभ देवेश, सर्पाय शशिशेखर, वर्षपापविशुद्धयर्थमर्ध्यो मे गृह्यताम तत:’

भगवान भोलेनाथ प्रसन्न करने के लिए ये समाना करें अर्पित 

भगवन भोले नाथ  भक्तों से बड़ी जल्दी प्रसन्न होते हैं। उसके लिए आप निम्न चीजें भगवन को अर्पित करें।

केसर, चीनी, इत्र, दूध, दही, घी, चंदन, शहद, भांग,सफेद पुष्प, धतूरा और बिल्व पत्र

जल: ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाएं

बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिएं, खंडित पत्र कभी न चढ़ाएं

अक्षत चढ़ाएं

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