रात 12 बजे बर्थडे केक काटने की आदत है तो हो जाएं सावधान, तबाह हो सकती है आपकी जिंदगी

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नई दिल्ली। अगर आपको भी रात 12 बजे जन्मदिन, एनिवर्सरी या फिर कोई त्योहार मनाने की आदत है तो ये खबर आपके लिए बहेद जरूरी है। रात के 12 बजने के बाद तारीख बदल जाती है और जैसे ही तारीख बदलती है हम अपना सेलिबेशन शुरु कर देते हैं लेकिन ये तरीका बहुत गलत। ऐसा करने से आपका बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

दरअसल, हिन्दू धर्म के अनुसार अगला दिन तारीख बदलने से नहीं बल्कि सूर्योदय के साथ होता है, जिसे शुभ माना जाता है। रात 12 बजे निशीथ काल (प्रेत काल) माना जाता है। निशीथ काल रात्रि 12 बजे से रात 3 बजे तक का समय होता है। आमजन इसे मध्यरात्रि या अर्ध रात्रि काल कहते हैं। शास्त्रानुसार, यह समय अदृश्य शक्तियों, भूत व पिशाच का समय होता है। इस समय में यह शक्ति अत्यधिक रूप से प्रबल हो जाती हैं।

हम जहां रहते हैं वहां कई ऐसी शक्तियां होती हैं, जो हमें दिखाई नहीं देतीं। मगर, कई बार वे हम पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं, जिससे हमारा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। जन्मदिन की पार्टी में अक्सर मदिरा व मांस का चलन होता है।ऐसे में प्रेतकाल में केक काटकर, मदिरा व मांस का सेवन करने से अदृश्य शक्तियां व्यक्ति की आयु व भाग्य में कमी करती हैं और दुर्भाग्य उसके द्वार पर दस्तक देता है। साल के कुछ दिनों को छोड़कर जैसे दीपावली, 4 नवरात्रि, जन्माष्टमी व शिवरात्रि पर निशीथ काल महानिशीथ काल बनकर शुभ प्रभाव देता है, जबकि अन्य समय में दूषित प्रभाव देता है।

इसलिए अगली बार आपका आपके दोस्त या परिवार में किसी का जन्मदिन हो, न्यू ईयर हो, क्रिसमस हो या फिर अन्य कोई भी अच्छा मौका हो आप रात 12 बजे सेलिब्रेशन करने के बजाए सूरज की उगती किरणों के साथ उसे मनाएं जिससे आपकी जिंदगी में खुशियां आएंगी।

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