बीजेपी उठा सकती है सख्त कदम, इस दिग्गज नेता से छीन सकती है पद

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चंडीगढ़। पंजाब में बीजेपी की चुनावों में लगातार हुई तीसरी हार के बाद संगठन में बदलाव की कवायद शुरू हो चुकी है। संगठन में बदलाव को लेकर बीते एक साल से इंतजार किए जा रहे कुछ भाजपा नेता सक्रिय हैं। चुनावों में लगातार हार से यह लगभग तय है कि हाईकमान पंजाब भाजपा के संगठन में बड़ा फेरबदल करेगा। इस क्रम में प्रदेश अध्‍यक्ष विजय सांपला पर भी गाज गिर सकती है।

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इससे पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा के केवल तीन विधायक जीते थे

यही वजह है कि निकाय चुनाव में हार के कारणों को लेकर भाजपा की अभी तक विस्तृत रिपोर्ट तैयार नहीं हो पाई है। भाजपा के प्रदेश प्रधान विजय सांपला के नेतृत्व में पंजाब में पार्टी की निकाय चुनाव में हार लगातार तीसरी हार है। इससे पहले विधानसभा चुनाव में भाजपा के केवल तीन विधायक जीते थे। इसके बाद भाजपा का लगातार कई चुनाव से गुरदासपुर लोकसभा की सीट पर चला आ रहा कब्जा भी खत्म हो गया और उपचुनाव में कांग्रेस जीत गई। फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना लगातार इस सीट को भाजपा की झोली में डालते आ रहे थे, लेकिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ एक लाख से ज्यादा मतों से जीत हासिल करके इस सीट से भाजपा का कब्जा खत्म कर दिया। यह सांपला की प्रधानगी में भाजपा की दूसरी हार थी।

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तीसरी हार का ठीकरा सांपला के सिर भी उनके विरोधी फोड़ सकते हैं

इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि भाजपा नगर निगमों के चुनाव में जरूर कांग्रेस के साथ दो-दो हाथ करेगी, लेकिन उम्मीद के विपरीत निकाय चुनाव में भी भाजपा को करारी हार देखने को मिली। वह भी तब जब भाजपा ने जालंधर व अमृतसर में बीते दस सालों से अपना कब्जा रखा था और मेयर भी भाजपा के ही थे। जाहिर है कि इस हार के बाद मेयरों की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठना तय है, लेकिन वह फिलहाल किसी पद पर नहीं हैं और रेस से बाहर हैं। इसलिए भाजपा की लगातार चुनावों में हुई तीसरी हार का ठीकरा सांपला के सिर भी उनके विरोधी फोड़ सकते हैं।

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एक साल से संगठन में बदलाव की बात हो रही

हालांकि पार्टी स्तर पर भी बीते एक साल से संगठन में बदलाव की बात हो रही है, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते बदलाव को टाल दिया जाता रहा है। इस बार आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी हाईकमान द्वारा कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है। निकाय चुनाव में भाजपा की तरफ से पूर्व प्रधानों सहित 12 से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं की ड्यूटियां लगाई गई थीं। इसके बाद भी कई ऐसे नेता रहे जिन्होंने निकाय चुनाव में विभिन्न प्रकार के बहाने बनाकर चुनावी ड्यूटी से किनारा कर लिया था।

इस बार जालंधर में पुराने छह पार्षदों को ही टिकट दी गई थी

निकाय चुनाव में भाजपा की तरफ से इस बार जालंधर में पुराने छह पार्षदों को ही टिकट दी गई थी, बाकी 45 नए चेहरे मैदान में उतारे गए थे। इसी प्रकार अमृतसर में पुराने चेहरों के साथ नए चेहरों को भी 60 व 40 के अनुपात में टिकटें दी गई थीं, लेकिन उसका भी लाभ नहीं मिला। वहीं पटियाला में 16 पुराने पार्षदों में तीन को मैदान में उतारा था, लेकिन वहां भी भाजपा का यह प्रयोग सफल नहीं रहा।

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