सुख भरे दिन बीते रे भइया.. अब तो दुख आयो है…

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मप्र। मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में सूखा ने आम आदमी की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। रोजगार के अवसर नहीं हैं, पानी के अभाव में खेती हो नहीं पा रही। ऐसे हालात में हर गांव से सैकड़ों परिवार पलायन कर गए हैं। औसतन आधी आबादी इस इलाके से रोजगार की तलाश में पलायन कर गई है। बुंदेलखंड के गैर सरकारी संगठनों के समूह ‘बुंदेलखंड जल मंच’ द्वारा किए गए अध्ययन में यह पता चला है।

बुंदेलखंड जल मंच द्वारा एक मई से नौ मई के बीच लगभग दो सौ गांवों में जाकर किए गए अध्ययन का प्रतिवेदन शुक्रवार को वॉटर प्राइज से सम्मानित राजेंद्र सिंह ने जारी किया। इस अध्ययन से एक बात साफ होती है कि इस इलाके के सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और दतिया जिलों से बड़ी संख्या में पलायन हो रहा है।

अध्ययन से पता चलता है कि एक परिवार को पानी की आपूर्ति करने में रोजाना पांच से आठ घंटे का समय लग जाता है। लोग पानी के इंतजाम में लग जाते हैं और इस कारण मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे हैं। इस कारण कई घरों में आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। इन सभी जिलों में 60 प्रतिशत से अधिक हैंडपम्प सूख गए हैं। जो चल रहे हैं, उनमें भी बमुश्किल पानी निकल रहा है।

जलसंकट के कारण इस बार रबी की फसल का न्यूनतम उत्पादन हुआ है। गांव में 50 प्रतिशत से अधिक लोग पलायन कर गए हैं, जिनमें से 15 से 45 साल के लोगों की संख्या अधिक है। अध्ययन से पता चलता है कि पालतू पशु लोगों ने खुले छोड़ दिए हैं।

कृषि संकट के कारण किसानों की हालत अत्यधिक खराब है, जिसका असर सबसे ज्यादा महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे बड़े पैमाने पर कुपोषित हो रहे हैं। कई प्रकार की बीमारियां भी बढ़ी हैं। किसानों के ऊपर काफी कर्ज चढ़ गया है। बुंदेलखंड एक जमाने में परंपरागत जल संरचनाओं के लिए जाना जाता था, आज भी इस इलाके में हजारों की तादाद में चंदेलकालीन जल संरचनाएं हैं, जो रखरखाव के अभाव में अपना अस्तित्व खो रही हैं।

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