मालदीव संकट पर चीन की भारत को धमकी, सैन्य हस्तक्षेप न करने को कहा

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नई दिल्ली। मालदीव में चल रहे राजनीतिक संकट को लेकर चीन ने भारत को चेतावनी दी है। चीन ने कहा है कि अगर भारत ने मालदीव में सैन्य हस्तक्षेप किया तो वह चुप नहीं बैठेगा। भारत उसकी ताकत को कम आंकने की गलती न करे। चीन के मुताबिक मालदीव में जो भी हो रहा है यह उसका आंतरिक मामला है इसमें भारत को दखल देने की जरुरत नहीं है। वो उसे खुद सुलझा लेंगे। चीन की तरफ से यह बयान वहां के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक संपादकीय के जरिए आया है।

मालदीव की भारत पर निर्भरता ने उसे अक्खड़ बना दिया है

चीनी अखबार में छपे लेख के मुताबिक मालदीव की भारत पर निर्भरता ने उसे अक्खड़ बना दिया है। चीन की तरफ से दिए इस बयान को मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के बयान की प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखा जा रहा है। बीते हफ्ते नशीद ने आरोप लगाया था कि निवेश की आड़ में चीन ने मालदीव के 17 द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है। उन्होंने भारत से मालदीव संकट में दखल देने और मदद करने का आग्रह भी किया था।

1988 में मालदीव में आए संकट का किया जिक्र

चीन ने 1988 में मालदीव में आए राजनीतिक संकट का जिक्र किया है। उसने कहा है कि पिछली बार जब 1988 में सरकार विरोधी कुछ लोगों ने श्रीलंका से आए हथियारबंद किराए के सैनिकों की मदद से सरकार का तख्तापलट करने की कोशिश की थी। भारत ने मालवीद के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल गयूम की गुजारिश पर 1600 सैनिकों का दस्ता भेजा और हालात को काबू किया। कुछ लोग कहते हैं कि भारत ने मालदीव की सरकार को बचाया, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि इस ऑपरेशन के जरिए भारत को अपना प्रभाव जमाने की कोशिश की।

चीन की तरफ से आए इस बयान में कहा गया है कि कुछ भारतीय मालदीव में सैन्य हस्तक्षेप की वकालत कर रहे हैं। हालांकि ये अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत नहीं आता, जो दूसरे देश की संप्रभुता, स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान और हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत के खिलाफ है।

अगर मालदीव में स्थिति खराब होती है तो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ही हल निकाला जाना चाहिये। एकतरफा सैन्य हस्तक्षेप पहले से ही वैश्विक व्यवस्था को बिगाड़ रहा है। चीन ने कहा है कि मालदीव दिल्ली से परेशान हो चुका है क्योंकि वो हमेशा उसे दबाने की कोशिश करता है।

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