डेली रूटीन से हो गए हैं बोर, तो चंपावत की ट्रिप करें प्लान

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देहरादून। क्या आप अपने डेली रूटीन से बोर हो गए हैं? क्या आप भी एक ट्रिप प्लान कर रहे हैं ताकि आप अपना मूड ठीक कर सकें। अगर हां तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, आज हम आपको चंपावत के बारे में बताने वाले हैं। यह जगह आपका मूड ठीक करने में आपको मदद करेगी क्योंकि चंपावत पर प्रकृति काफी मेहरबान है।

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बताते चलें, उत्तराखंड का ऐतिहासिक चंपावत जिला अपने आकर्षक मंदिरों और खूबसूरत वास्तुशिल्प के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। पहाड़ों और मैदानों के बीच से होकर बहती नदियां अद्भुत छटा बिखेरती हैं। चंपावत में पर्यटकों को वह सब कुछ मिलता है जो वह एक पर्वतीय स्थान से चाहते हैं।

वन्यजीवों से लेकर हरे-भरे मैदानों तक और ट्रैकिंग की सुविधा, सभी कुछ यहां पर है। यही नहीं, चंपावत कई सालों तक कुंमाऊं के शासकों की राजधानी रहा है। चांद शासकों के किले के अवशेष आज भी चंपावत में देखे जा सकते हैं।

मुख्य आकर्षण

बालेश्रवर मंदिर

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण चांद शासन ने करवाया था। इस मंदिर की वास्तुकला काफी सुंदर है। ऐसा माना जाता है कि बालेश्रवर मंदिर का निर्माण 10-12 शताब्दी में हुआ था।

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शनि देवता मंदिर

यह मंदिर चंपावत जिले के मौराड़ी गॉव में स्थित है, जो कि चंपावत से आगे बनलेख के समीप में ही है। यह मनोकामना मंदिर है, इस मंदिर में आकर भक्तजन अपनी मनोकामना वक्त करते हैँ और उनकी मनोकामना अवश्य पुर्ण होती है। यह मंदिर अति रमणीय है तथा इस मंदिर का परिसर अति सुंदर है। आप भी आकर पुण्य कमायें। यहॉ के पुजारी श्री घनश्याम जोशी जी सदा देव पर्वोँ में यहॉ आकर भक्तोँ का मनोबल बढ़ाते हैं।

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नागनाथ मंदिर

इस मंदिर में की गई वास्तुकला काफी खूबसूरत है। यह कुंमाऊं के पुराने मंदिरों में से एक है।

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मीठा-रीठा साहिब

यह सिक्खों के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक है। यह स्थान चंपावत से 72 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि सिक्खों के प्रथम गुरू, गुरू नानक जी यहां पर आए थे। यह गुरूद्वारा जहां पर स्थित है वहां लोदिया और रतिया नदियों का संगम होता है। गुरूद्वार परिसर पर रीठे के कई वृक्ष लगे हुए है। ऐसा माना जाता है कि गुरू के स्पर्श से रीठा मीठा हो जाता है। गुरूद्वारा के साथ में ही धीरनाथ मंदिर भी है। बैसाख पूर्णिमा के अवसर पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है।

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पूर्णनागिरी मंदिर

यह पवित्र मंदिर पूर्णनागिरी पर्वत पर स्थित है। यह मंदिर तंकपुर से 20 किलोमीटर तथा चंपावत से 92 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पूरे देश से काफी संख्या में भक्तगण इस मंदिर में आते हैं। इस मंदिर में सबसे अधिक भीड़ चैत्र नवरात्रों (मार्च-अर्प्रैल) में होती है। यहां से काली नदी भी प्रवाहित होती है जिसे शारदा के नाम से जाना जाता है।

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श्यामलातल

यह जगह चंपावत से 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके साथ ही यह स्थान स्वामी विवेकानन्द आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध है जो कि खूबसूरत श्यामातल झील के तट पर स्थित है। इस झील का पानी नीले रंग का है। यह झील 1.5 वर्ग किलोमीटर तक फैली हुई है। इसके अलावा यहां लगने वाला झूला मेला भी काफी प्रसिद्ध है।

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अब्बोट माउंट

अब्बोट माउंट बहुत ही खूबसूरत जगह है। इस स्थान पर ब्रिटिश काल के कई बंगले मौजूद है। यह खूबसूरत जगह लोहाघाट से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा यह जगह 2001 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

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पंचेश्रवर

यह स्थान नेपाल सीमा के समीप स्थित है। इस जगह पर काली और सरयू नदियां आपस में मिलती है। पंचेश्रवर भगवान शिव के मंदिर के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। काफी संख्या में भक्तगण यहां लगने वाले मेलों के दौरान आते हैं। और इन नदियों में डूबकी लगाते हैं।

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