सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से कूड़े के ढ़ेर में तब्दील में होता जा रहा देहरादून

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देहरादून। मामला देहरादून का है जहां कई सफाईकर्मचारी अपनी समस्याओं को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। अपनी मांगो को लेकर हड़ताल पर बैठे पर कर्मचारियों की वजह से देहरादून कूड़े के ढेर में तब्दील होती जा रही है। इसी के साथ राजधानी में रहने वाले लोगों का कहना है कि हुई इस हड़ताल से लोगों का रहना दूभर होता जा रहा है। स्थानीय लोगों की मुसीबत और ज्यादा बढ़ती जा रही है।

इस हड़ताल के बारे में भाजपा प्रवक्ता मुन्ना सिंह ने सिर्फ सफाई कर्मचारियों को ही जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही उन्होंनेकहा है कि उनकी मांगो को लेकर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उन्हें बैठक के लिए बुलाया था, लेकिन मौके पर कोई भी कर्मचारी नहीं पहुंचे। इसीलिए वह खुद जिम्मेदार है। आगे चौहान कहते हैं कि राजधानी कूड़े के ढ़ेर में ढलती चली जा रही है। कर्मचारियों के काम ठप कर देने से बहुत ज्यादा मुश्किलें हो रही है।

इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के साथ कांग्रेस के नेता धरने पर सफाई कर्मचारियों का साथ देने पहुंचे। साथ ही उन्होंने उनकी मांग का समर्थन भी दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को मांगे मान लेनी चाहिए लेकिन लगता है राजधानी के दशा सरकार को नज़र नहीं आ रही है।

क्या है मामला
पिछले 9 दिन से चल रही इस हड़ताल के बारे में बता दे कि सफाई कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें 285 रुपये न्यूनतम मज़दूरी दी जाए और उनको संविदा कर्मचारी के रूप में समायोजित किया जाए ताकि महंगाई के इस दौर में उनका परिवार चल सके। अभी तक कर्मचारियों को 5000 रुपये प्रतिमाह को मानदेय दिया जाता है जो प्रतिदिन न्यूनतम मज़दूरी से 120 रुपये कम है। अगर सरकार सफाई कर्मचारियों की न्यूनतम मज़दूरी की मांग को मान लेती है तो सरकार पूरा कर देती है तो इनका मानदेय प्रतिमाह 5000 की जगह 8550 रुपये हो जाएगा। इसके आगे वह कहते हैं कि अगर सरकार उनकी मांग को मान ले तो वह काम भी शुरु कर देंगे।

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