प्रशासन द्वारा रैली रद्द कराए जाने के बावजूद युवा हुंकार रैली में पहुंचे 2000 लोग

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नई दिल्ली। बीते दिनों दिल्ली में अपनी युवा हुंकार रैली निकालने को लेकर दलित नेता जिग्नेश मेवाणी व प्रशासन आमने-सामने आ गए थे। दलित नेता और गुजरात के वडगाम से एमएलए जिग्नेश मेवाणी ने कहा है कि प्रशासन के विरोध के बावजूद रैली में आए लोगों की संख्या से वे संतुष्ट हैं। उन्होंने रैली में करीब दो हजार लोगों के पहुंचने की पुष्टि की। दिल्ली में जिग्नेश मेवाणी की इस युवा हुंकार रैली को आयोजित करवाने में भीम आर्मी व लेफ्ट के सदस्यों ने भी उनका सहयोग करते हुए प्रशासन से सीधी टक्कर ली।

शांति मार्च निकालने की अनुमति देने में क्या परेशानी

रैली में शामिल होने के बाद जिग्नेश ने प्रशासन से सवाल पूछा कि जनता के चुने हुए एक प्रतिनिधि को या देश के आम नागरिक को शांति मार्च निकालने की अनुमति देने में प्रशासन को क्या परेशानी है। इस तरीके से वे शांति के साथ सरकार व लोगों तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं, तो इसमें बुराई क्या है। इस रैली में मशुहूर दलित नेता चंद्रशखर आजाद उर्फ रावण को जेल से रिहा करने की मांग की गई।

कार्यक्रम रद्द कराने के अभियान को बताया विफल

जिग्नेश के अनुसार रैली को रद्द कराने के पुलिस की तरफ से ट्वीट किया गया था। इसके अलावा रैली ना हो पाये इसके लिए एक अभियान भी चलाया गया था। जोकि पूरी तरह से विफल रहा। उनके अनुसरार रैली में करीब 2000 लोगों ने हिस्सा लिया। रैली में आए लोगों की संख्या से वे संतुष्ट हैं।

जाति-धर्म से ऊपर उठ लडेंगे लडाई

दलित नेता या युवा नेता में से वे क्या कहलाना पसंद करेंगे इस सवाल के जवाब में मेवाणी ने कहा कि वे अन्य युवा नेताओं के साथ जाति और धर्म से ऊपर उठेंगे और देश में युवाओं के समस्याओं का समाधान करने की लड़ाई लड़ेंगे।
मेवाणी ने कहा, “जल्द ही हम प्रगतिशील लोगों और अंबेडकर की विचारधारा को मानने वालों के साथ हाथ मिलाकर अपना विस्तार करेंगे। दलित परिवार से एक युवा नेता की मौजूदगी भी आवश्यक है।”
हालांकि ट्विटर व अन्य सोशल मीडिया के माध्यमों के जरिए मेवाणी की ये रैली फेल बताई जा रही है लेकिन मेवाणी ने अपनी रैली में आए लोगों की संख्या पर संतुष्टि जताई है।

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