भूलकर भी इस तरह न करें भोजन, बर्बाद हो जाएगा तन-मन-धन

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नई दिल्ली। हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार अन्न को देवता का दर्जा दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि जिन व्यक्तियों पर अन्न देवता की कृपा रहती है, उनका घर हमेशा अन्न व धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है। इसके साथ-साथ ऐसे लोग सदैव निरोगी भी रहते हैं। इन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कम ही सामना करना पड़ता है। वहीं जिन व्यक्तियों से अन्न देव नाराज हो जाते हैं, उनके घर में अन्न के अलावा धन का भी अकाल पड़ जाता है। ऐसे लोगों का तन-मन-धन सब कुछ धीरे-धीरे नष्ट होना शुरु हो जाता है।

आज हम आपको भोजन करने के कुछ ऐसे तरीके व सिद्वांतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप अन्न देवता को प्रसन्न कर अपार सुख-संपत्ति व वैभव की प्राप्ति कर पाएंगे। जबकि इन नियमों का पालन न करने पर आप बर्बादी को निमंत्रण देंगे।

जानिए क्या हैं वो नियम
ऐसी मान्यता है कि दक्षिण की ओर मुंह करके खाने से प्रेतत्व की प्राप्ति होती है और पश्चिम की ओर मुख करके खाने से मानव रोगी होता है, जबकि हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने से मनुष्य की आयु व धन बढ़ता है।

ग्रंथो मे ऐसा कहा गया है कि जो जातक, जो बिना हाथ-मुंह धोए, बिना नहाये या गंदे स्थान पर बैठकर भोजन करते हैं, हमेशा आर्थिक परेशानियों से जूझते रहते हैं और अन्न की कमी हमेशा बनी रहती है, स्वास्थ्य भी खराब रहता है। इसलिए भोजन करने से पहले स्नान करना करना चाहिए इससे स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं भी दूर रहती है और अच्छा भी महसूस होता है।

शास्त्रों में खड़े होकर या बिस्तर, कुर्सी, सोफा आदि पर बैठकर भोजन करना धार्मिक दृष्टि से गलत माना गया है क्योंकि इस मुद्रा में भोजन करने से भोजन अच्छी तरह से पच नहीं पता है और उसके पोषक तत्व शरीर को नहीं मिल पते है। भोजन करने का सबसे उपयुक्त स्थान जमीन को बताया गया है।

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