देसी प्रोडक्ट के साथ डॉग्स भी देसी अपनाएं

0

आगरा। जिन्हें देखकर पत्थर मारते थे आज उन्हें देखकर चेहरे खिले थे। साफ सुथरे स्ट्रीट डॉग के पपी को देखकर हर बच्चे का चेहरा खिला था, और उसे गोद में उठाने के लिए लालायित था। इस बदलाव का कारण था स्ट्रीट डॉग के लिए कैस्पर्स होम द्वारा कमला नगर स्थित सेक्रड मदर्स स्कूल में आयोजित किया जागरूकता कार्यक्रम। जिसमें शिक्षकों व अभिभावकों ने 9 स्ट्रीट डॉग के पपी को अडोप्ट भी किया।

शिक्षकों व अभिभावकों ने अडोप्ट किए नौ स्ट्रीट डॉग्स के पपी

कैस्पर्स होम शैल्टर की चेयरपर्सन विनीता अरोरा ने बताया कि डॉग की वैरायटी में इंडियन ब्रीड भी कुछ कम नहीं, बशर्ते उन्हें आप विदेशी ब्रीड साइबेरियन हस्की, जर्मन शैफर्ड. पग जैसे लाड़ प्यार और पोषण युक्त आहार खिलाकर पालें। हजारों-लाखों की कीमत देकर विदेशी ब्रीड के डॉग खरीदे जाते हैं, और देसी डॉग को दुदकारा जाता है। जबकि देसी डॉग एक घर नहीं पूरी कॉलोनी की चौकीदारी और सुरक्षा करते हैं। कहा कि विदेशी ब्रीड के महंगे डॉग पालने के बजाय हमें देसी डॉग की देखरेख करनी चाहिए। कुछ नहीं तो आप अपनी कॉलोनी या मौहल्ले के डॉग को ही एक वक्त खाना देकर उसकी देखरेख में सहयोगी बन सकती हैं। अतिथियों का स्वागत स्कूल की प्रधानाचार्य नम्रता पेनीकर ने किया। इस अवसर पर पूजा अग्रवाल, कृतिका, नीरा, रूपाली, मधु, वत्सला, अपूर्वा सारस्वत, यश गौतम, रचना ठाकुर, राकेश कोहली आदि मौजूद थे।

एक जानवर के जान की कीमत मात्र 50 रुपए

फ्रेंड्स शिएटर ग्रुप के कलाकारों ने नीरज द्वारा लिखित नाट्य प्रस्तुति के जरिए पशुओं से प्रेम करने व साथ उनके साथ होने वाले अत्याचारों पर प्रकाश डाला। नाटक के जरिए उन्होंने बताया कि एक जानवर की जान की कीमत कानूनी किताबों में मात्र 50 रुपए है। विनीता अरोरा ने बताया कि इंडिया यूनाइट्स फॉर एनीमल कैम्पेन के तहत देश भर में जानवरों के प्रति होने वाली क्रूरता के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

इन्होंने किए स्ट्रीट डॉग के पपी अडोप्ट

आगरा। विजय गुप्ता, कृष्णा वर्मा, सावित्री, जुगनू, गुड्डन, दुर्गेश कुमार गुप्ता, कृष्ण कुमार, ब्रजेश, सीमा शर्मा। अडोप्शन प्रमाण जी जांच कर कराया गया। अडोप्शन करने वाले लोगों को गिफ्ट हैम्पर भी प्रदान किए गए।

 

loading...
शेयर करें

आपकी राय