फिल्म रिव्यू: बाप कूल तो बेटा ओल्ड स्कूल, हंसी और ठहाकों के सफर पर लेकर जाएगी ये कहानी

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फिल्म का नाम :  ‘102 नॉट आउट’

स्टार कास्ट  : अमिताभ बच्‍चन, ऋषि कपूर, जिमित त्रिवेदी

डायरेक्टर : उमेश शुक्‍ला

निर्माताः ट्रीटॉप एंटरटेनमेंट/बैंचमार्क पिक्चर्स

रेटिंग : 3.2 स्टार

कहानी-
यह फिल्म एक सिंपल बाप-बेटे की अनोखी लव-स्‍टोरी है जिसे आप पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं। उमेश शुक्ला द्वारा निर्देशित इस फिल्म में प्यार, मस्ती, ठहाके और कई सारे इमोशन्स हैं। यह कहानी 102 साल के दत्तात्रे की है जिसकी जिन्दगी में सुस्त-सुस्त। ढीले-ढीले। मरे-मरे। न सांसों के आने की खबर, न जाने का पता। इन सब बातों की कोई जगह नहीं है। दत्तात्रे एक ऐसा व्यक्ति है जो चीन के सबसे ज्यादा जीवित रहे व्यक्ति का रिकार्ड तोड़ना चाहता है, लेकिन बात करें उसके बेटे की तो अभी 75 साल का है बावजूद उसके वह खुद को दुनिया का सबसे बुजर्ग व्यक्ति बताता है।

अपने बेटे की ऐसी हरकत देखकर दत्तात्रे फैसला लेता है कि वह उसके वृद्धाश्रम भेजेगा। अपने पिता की यह बात सुनकर उसका बेटा बेचैन हो जाता है। साथ ही वह अपने पिता से ऐसा न करने के लिए बोलता है। अपने बेटे को वृद्धाश्रम न भेजने की ऐवज में यह पिता अपने बेटे के सामने कुछ शर्तें रखता है और उसे वह सारी शर्तें माननी पड़ती हैं। क्या हैं वह शर्तें, कैसे होंगी वह पूरी इसे देखने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना पड़ेगा।

डायरेक्शन-
बात करें डायरेक्शन की तो उमेश शुक्ला ने गुजराती नाटक से प्रेरित होकर इस फिल्म को बनाया है। फिल्म के डायरेक्शन को अच्छा बताया जा रहा है। साथ ही पर्दे पर इसे काफी नाटकीय अंदाज में दर्शाया गया है।

एक्टिंग-
एक्टिंग के बारे में बात करें तो इससे पहले भी ऋषि कपूर और बिग बी को इस किरदार में देखा जा चुका है। एक तरफ अमिताभ की कॉमिक टाइमिंग मजेदार है तो वहीं ऋषि कपूर अकड़ू अंदाज़ में लोगों ने काफी ज्यादा पसंद किया है। इस सितारे को उसकी उर्जा के लिए पसंद करने वाले निराश होंगे। 102 मिनट की फिल्म में चुनिंदा किरदार हैं और यह रंगमंचीय प्रोजेक्ट जैसी लगती है।

देखें या नहीं-
यह फिल्म फिल्म उन लोगों की जरूर कुछ मदद कर सकती है जो जिंदगी से ऊबे और ठहरे हैं। अगर आप अपने माता-पिता से दूर रह रहे हैं तो फिल्‍म के आखिर में सिनेमाघर से निकते हुए आपको उनसे एक बार बात करने का जरूर मन कर सकता है। ‘102 नॉट आउट’ जिंदगी में रुकने और मरने के सख्त खिलाफ है। आप जहां हैं, वहीं कदमताल करते रहिए। जिंदगी के कदमों की आहट सुनाई देती रहेगी।

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