फिल्म रिव्यू : ‘हसीना पारकर’ के रोल में जम नहीं रहीं श्रद्धा कपूर, कहानी में भी नहीं है दम

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फिल्म का नाम : हसीना पारकर

डायरेक्टर : अपूर्व लाखिया

स्टार कास्ट : श्रद्धा कपूर, अंकुर भाटिया, सिद्धांत कपूर, दधि पांडेय

रेटिंग : 2 स्टार

कहानी

फिल्म की कहानी कोर्ट रूम से शुरु होती है जब हसीना पारकर (श्रद्धा कपूर) पेशी के लिए आती हैं। इस दौरान महिला वकील (प्रियंका सेतिया) हसीना से उनके पिता (दधि पांडेय), पति (अंकुर भाटिया) और भाई (सिद्धांत कपूर) के बारे में सवाल पूछती हैं। हसीना वकील के सवालों का जवाब देती हैं जिसमें  बाबरी मस्जिद, हिंदू मुस्लिम दंगे, मुंम्बई ब्लास्ट जैसी घटनाओं का जिक्र होता है। नए- नए खुलासों से फिल्म में काफी ट्विस्ट एंड टर्न्स आते हैं। कोर्ट इस केस में क्या फैसला सुनाती है, फिल्म को क्या अंजाम मिलता है इसके लिए आपको सिनेमाघर तक जाना पड़ेगा।

डायरेक्शन

शूटआउट एट लोखंडवाला, एक अजनबी, जंजीर जैसी फिल्मों को डायरेक्ट कर चुके अपूर्व लखिया ने ठीक-ठाक काम किया है। फिल्म में कैमरा वर्क कमाल का है, हालांकि फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले काफी कमजोर है, जिसकी वजह से एक वक़्त के बाद काफी बोरियत होने लगती है। इसपर थोड़ा और काम किया जा सकता था। डायलॉग्स भी ज्यादा दमदार नहीं हैं। फिल्म की एडिटिंग और दुरूस्त की जा सकती थी।

एक्टिंग

श्रद्धा कपूर पहली बार निगेटिव रोल में नज़र आई हैं, लेकिन वो हसीना के रोल के साथ उतना न्याय नहीं कर सकीं। सिद्धांत कपूर अंडरवर्ल्ड डॉन के रोल में फिट नहीं बैठे। हालांकि पिता के रोल में दधि पांडेय का काम काफी अच्छा है।

म्यूजिक

फिल्म का म्यूजिक कुछ खास नहीं है। बैकग्राउंड स्कोर ज्यादा अच्छा नहीं है और कुछ गानें जबरदस्ती डालें गए हैं जिनकी जरूरत नहीं थी।

देखें या नहीं

श्रद्धा कपूर के फैन हैं और उनको निगेटिव रोल में देखना चाहते हैं तो फिल्म देखने जा सकते हैं।

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