लंगर भी झेल रहे जीएसटी की मार, देना पड़ रहा करोड़ों का टैक्स

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लुधियाना। कुछ समय पहले देश में लागू किये गए वस्तु एवं सेवा कर अब मुफ्त भोजन कराने वाली संश्थाओं को काफी कष्ट दे रहा है। बता दें कि गुरुद्वारों में मुफ्त भोजन सुविधा ‘लंगर’ को जारी रखने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

देश के पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में गुरुद्वारा का प्रबंधन देखने वाली शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने दावा किया है कि जीएसटी लागू होने के बाद मुफ्त भोजन सेवा को आगे बढ़ाने में अतिरिक्त वित्तीय भार का सामना करना पड़ रहा है, जो कि बहुत चिंता का विषय है।

अमृतसर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर में एसजीपीसी ने दावा किया कि लगभग दो करोड़ रुपये जीएसटी देना पड़ा है। स्वर्ण मंदिर परिसर में सप्ताहंतों और अन्य व्यस्त दिनों में विभिन्न धर्मो, संस्कृति, जातियों, देशों और लिंगों के लगभग 1 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त भोजन मुहैया कराया जाता है। सामान्य दिनों में यहां तकरीबन 50 हजार लोग भोजन करते हैं। पूरी तरह से मुफ्त में शाकाहारी भोजन कराने वाला यह सामुदायिक भोजनालय विश्व में इस तरह की सेवा करने वाले सबसे बड़े भोजनालयों में से एक है।

इस मामले में एसजीपीसी के प्रवक्ता दिलजीत सिंह बेदी ने कहा कि पिछले साल जीएसटी लागू होने के बाद लंगर के लिए राशन और प्रसाद खरीदने में हमें 2 करोड़ रुपये की राशि जीएसटी के तहत देनी पड़ी। हमें 1 जुलाई 2017 से 31 जनवरी 2018 तक स्वर्ण मंदिर में लंगर के लिए विभिन्न सामग्रियों को खरीदने में 2 करोड़ रुपये बतौर जीएसटी चुकाने पड़े। लंगर के लिए स्वर्ण मंदिर परिसर और अन्य गुरुद्वारों में वार्षिक रूप से हजारों टन गेंहू, देशी घी, चावल, सब्जियां, दूध, चीनी, और चावल का प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही लाखों लीटर पानी का भी प्रयोग होता है।

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