नेस्ले समेत 9 बड़ी कंपनियों पर गिरी सरकार की गाज, अब नहीं दिखेंगे इनके विज्ञापन

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नई दिल्ली। सरकार ने कार्टून चैनलों पर दिखाए जाने वाले जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। ये फैसला बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी हितों को देखते हुए लिया गया है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि जंक फूड बच्चों में बीमारियां बढ़ाने का काम कर रहे हैं। बच्चे इनके विज्ञापन को देखकर इनकी तरफ आकर्षित होते हैं।

जिस वजह से इन्हें बच्चों के चैनलों पर न दिखाए जाने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के बाद कोकाकोला, नेस्ले समेत देश की करीब 9 बड़ी कंपनियों के विज्ञापन इन चैनलों पर नहीं दिखाए जाएंगे। ये विज्ञापन अन्य चैनलों पर दिखाएं जा सकेंगे।

भारतीय खाद्द सुरक्षा मानक प्राधिकरण समित (एफएसएसआई) ने पेश की अपनी रिपोर्ट

राज्यवर्धन सिंह राठौर ने लोकसभा में एफएसएसआई की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर 11 सदस्यों की एक कमेटी गठित की गई थी। जिसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में एफएसएसआई और भारतीय विज्ञापन मानक परिषद के बीच भी समझौता हुआ है। इस समझौते के अनुसार देश की नौ नामी फूड कंपनियों ने भरोसा दिलाया कि वे ऐसे विज्ञापन बच्चों के चैनलों पर नहीं दिखाएंगे।

राजवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि विज्ञापन देखने के कारण बच्चोंन और किशोरों में जंक फूड खाने की लत लग रही है। वहीं टीवी देखने के दौरान बच्चेस ज्याोदा मात्रा में ऐसे फूड को खा जाते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदेह है। ऐसे में इस फैसले से बच्चों को जंक फूड से बचाने की कोशिश की जा रही है।

कंपनियों ने किया सरकार के फैसले का स्वागत

सरकार क फैसल का सम्मान करते हुए कोका कोला और नेस्ले समेत 9 कंपनियों ने स्वेच्छा से कहा है कि वो बच्चों के चैनल पर इस चीजों के विज्ञापन नहीं दिखाएंगी। विज्ञापनों को लेकर इस तरह का कोई नियम पहली बार बनाया गया है। फिलहाल देश में विज्ञापनों को नियंत्रित करने के लिए कोई कानून नहीं है जो जंक फूड के विज्ञापनों पर रोक लगा सके।

वैज्ञानिक पहले ही बता चुके हैं जंक फूड को बच्चों की सेहत का दुश्मन

वैज्ञानिकों ने भी आगाह किया है कि टीवी पर आने वाले विज्ञापनों से किशोरों में जंग फूड खाने की लत लग रही है। उन्होंने कहा कि रोजाना तीन घंटे से ज्यादा टीवी देखने वाले किशोर कम टीवी देखने वाले बच्चों की तुलना में सालभर में साफ्ट ड्रिंक्स, बिस्कुट और चिप्स जैसे स्नैक्स ज्यादा खा जाते हैं। साथ ही वैज्ञानिकों ने बताया कि एनर्जी और साफ्ट ड्रिंक्स में उच्च मात्रा में चीनी होती है। ब्रिटेन के कैंसर रिसर्च ने यह सर्वे 11 से 19 साल के 3,348 बच्चों की टीवी देखने की आदत और उनके खानपान को लेकर किया गया था।

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