यहां के युवा बैंकों में जमा करा रहे स्पर्म ताकि भविष्य में न हो परेशानी

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भोपाल। भारत में प्रोफेशनल्स की लाइफ स्टाइल बदल रही है। करियर बनाने में मगन प्रोफेशनल्स धड़ाधड़ नोट छपने में लगे हुवे हैं। आलम यह है कि उन्हें शादी करने तक की फुर्सत नहीं है। इतना ही नहीं जिन प्रोफेशनल्स की शादी हो भी चुकी है उनके पास बच्चा पैदा करने की फुर्सत नहीं है। उम्र गुज़ारे के बाद संतान उत्पत्ति में दिक्कत ना हो इसलिए वो जवानी के दिनों में स्पर्म बैंक में अपने अंडाणु जमा करवा रहे हैं। जब फुर्सत मिलेगी तो बैंक से अपने अंडाणु निकालकर बच्चे पैदा कर लेंगे। ये एकदम न्यू इंडिया है। जिसकी कल्पना आम आदमी तो कर ही नहीं सकता।

बेंगलुरु में एक निजी कंपनी में बतौर सीईओ काम कर रही 31 साल की एक युवती को मां बनने की फिक्र तो है, लेकिन पहले करियर बनाना है। इसी वजह से अभी तक शादी नहीं की है। देर से शादी के बाद गर्भधारण में दिक्कत हो सकती है। संतानहीनता की भी आशंका है। लिहाजा, उसने पहले से ही अपने अंडाणु निकलवाकर इंदौर के एक आईवीएफ सेंटर के बैंक में सुरक्षित रखवा दिए हैं।

यह कोई इकलौता मामला नहीं है। कई पेशेवर युवा स्पर्म और अंडाणु सहेज कर रख रहे हैं, ताकि उम्र अधिक होने से माता-पिता बनने में दिक्कत न आए। देशभर में करीब ढाई हजार आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटर हैं। उनमें से करीब 2 हजार स्पर्म और अंडे को सुरक्षित रखने के लिए बैंक का काम भी कर रहे हैं।

इंडियन सोसायटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन के चेयरपर्सन वीरेंद्र वी शाह ने चर्चा में बताया कि उनके सेंटर में अब तक करीब 28 युवा स्पर्म और अंडाणु सुरक्षित रख चुके हैं। ये आंकड़े पिछले 3 साल के हैं। स्पर्म व अंडाणु सुरक्षित रखवाने वालों में मॉडलिंग करने वाले युवा भी हैं, जो फिलहाल शादी नहीं करना चाहते। इसी तरह से भ्रूण (एंब्रियो) बैंकिंग भी की जा रही है। एंब्रियो बैंकिंग वे दंपती करा रहे हैं जिन्हें संतान नहीं हैं।

डॉ. वीरेंद्र के मुताबिक उनके पास ऐसे कैंसर मरीजों के भी स्पर्म व अंडे सुरक्षित रखे हैं, जिनकी कीमोथैरेपी होने वाली है। कीमो के बाद पुरुषाें के टेस्टिस में असर होने से स्पर्म व महिलाओं के अंडाशय में अंडाणु बनना बंद हो सकते हैं।

स्पर्म को बैंक में जमा करवाने का खर्च आम आदमी से तो परे है, मगर हाईक्लास और प्रोफेशनल्स के लिए अब ये आम बात हो चली है। स्पर्म को बैंक में जमा करवाने की कीमत 10 हज़ार रुपये प्रति सालाना होती है। स्पर्म को अधिकतम 25 साल तक सेफ रखा जा सकता है। वही अंडाणु को जमा करवाने की कीमत डेढ़ लाख रुपये 3 साल तक के लिए है। इस तकनीक को विक्ट्रीफिकेशन कहते हैं।

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