होली विशेष :  जानिए क्यों मनाते हैं यह त्यौहार, क्या मतलब है होलिका दहन का

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नई दिल्ली। होली हिंदुओं का एक विशेष त्यौहार है। इसका इंतजार लोगों को पूरे साल रहता है। इस दिन लोग आपस में मिलजुल कर पुराने गिले-शिकवे दूर करते हैं। रंगों से सरोबार इस त्यौहार का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है। होली खेलने से एक दिन पहले होलिका दहन की परंपरा निभाई जाती है। होली के इस विशेष दिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों मनाते हैं यह त्यौहार।

जानिए कैसे शुरु हुई होलिका दहन की परंपरा

हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत का एक राजा था, जोकि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था, जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए ताकत पाने के लिए उसने सालों तक तपस्या की। आखिरकार उसे वरदान मिला। लेकिन इससे हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और लोगों से खुद की भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा।

इस दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद था और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रहलाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का निर्णय किया।

उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए। क्योंकि होलिका के पास ऐसी शक्ति थी कि वह आग में जल नहीं सकती थी। उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी, लेकिन यह सफल नहीं हो सकी, क्योंकि प्रहलाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर राख हो गई। होलिका की ये हार बुराई के नष्ट होने का प्रतीक है। इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया इसके चलते भारत के कुछ राज्यों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होली जलाई जाती है।

जानिए आखिर क्यों रंगों से खेलकर ही मनाते हैं होली

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण रंगों से होली मनाते थे, इसलिए होली का यह तरीका लोकप्रिय हुआ। वो वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे पूरे गांव में शैतानियां करते थे। आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती।

होली वसंत का त्यौहार है और इसके आने पर सर्दियां खत्म होती हैं। कुछ हिस्सों में इस त्यौहार का संबंध वसंत की फसल पकने से भी है। किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुशी में होली मनाते हैं। होली को वसंत महोत्सव या काम महोत्सव भी कहते हैं।

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