वोट की खातिर बीजेपी खेलने जा रही मुस्लिम कार्ड – ममता के उड़े होश, सत्ता पर मंडराया खतरा

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कोलकाता। देश में राजनीति का माहौल काफी गर्म है। 2018 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां इसकी तैयारियों में जुटी हुई हैं। वहीं, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में भी राजनीति चालू है। यहां मिशन 2019 की अभी से तैयारी होने लगी है। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी हिंदुत्व कार्ड खेल रही हैं, वहीं बीजेपी भी पीछे नहीं है।

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बीजेपी मुस्लिमों को भी गले लगाने की कवायद में है

पश्चिम बंगाल में बीजेपी पैर जमाने के लिए मुस्लिमों को भी गले लगाने की कवायद में है। ममता के हिंदूत्व कार्ड के सामने राज्य में मुस्लिम मतों की सियासी अहमियत को देखते हुए बीजेपी कोलकाता के मो। अली पार्क में आज अल्पसंख्यक सम्मेलन कर रही है। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्‍दुल राशिद अंसारी के साथ पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष और वरिष्‍ठ नेता मुकुल राय संबोधित करेंगे। पश्चिम बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है।

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अब बीजेपी भी मुस्लिमों को रिझाने में जुट गई है

राज्य में लेफ्ट और टीएमसी के बाद अब बीजेपी भी मुस्लिमों को रिझाने में जुट गई है। इस साल होने वाले पंचायत चुनाव के मद्देनजर ही बीजेपी के मुस्लिम सम्मेलन को देखा जा रहा है। देर से बीजेपी ने महसूस किया है कि वह 30 फीसदी मजबूत मुस्लिम वोटों को लुभाए बिना बंगाल नहीं जीत सकती। पश्चिम बंगाल में पैर जमाने की जुगत में जुटी बीजेपी की नजर अब पंचायत चुनावों पर है। पश्चिम बंगाल की सत्ता में आने के लिए मुस्लिम वोट जरूरी है, लिहाजा इस समुदाय पर पकड़ बनाने के लिए बीजेपी का अल्पसंख्यक मोर्चा पूरी तरह से जुट गया है।

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बीजेपी के मुस्लिम सम्मेलन पर क्या बोली टीएमसी

वहीं, बीजेपी के मुस्लिम सम्मेलन को लेकर टीएमसी ने निशाना साधा है। टीएमसी नेता सदन पांडे ने कहा कि मुसलमान कभी भी बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे। क्योंकि उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री खुद आरएसएस स्वयंसेवक हैं और उनका एकमात्र एजेंडा देश को धार्मिक और जाति रेखा पर विभाजित करना है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए काम करती हैं, न कि धार्मिक रेखा पर।

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