रिसर्च : कम रोशनी में ज्यादा चलता है दिमाग

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जर्मनी। कम रोशनी में इन्सान का दिमाग काफी तेज चलता है। ये हम नहीं एक रिसर्च कहती है। रिसर्च के मुताबिक, कम रोशनी न सिर्फ आपकी आंखों को राहत देती है बल्कि इससे आपका मस्तिष्क बेहतर तरीके से कल्पनाएं कर सकता, तेजी से सोच सकता है। यानि कम रोशनी में दिमाग की बत्ती तेज जलती है।   इस रिसर्च को जर्मनी के स्टटगार्ड और होयेनहेम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया है। इनके रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग कम रोशनी में बैठते हैं उनके दिमाग में ज्यादा कल्पनाएं आती हैं। सामान्य रोशनी और तेज रोशनी में बैठे लोग उतनी कल्पनाएं नहीं कर पाते हैं।

रिसर्च से ये बता सामने आयीं हैं कि थोड़ी कम रोशनी रहने से हमारा दिमाग ज्यादा तेज चलता है और इसमें तरह तरह के आइडिया आते हैं। जो लोग कम रोशनी में बैठते हैं वो अपने आपको बंधनमुक्त महसूस करते हैं। और इन्हीं बैटन का असर उसके विचारों पर पड़ता है।

रिसर्चर के मुताबिक, लोग अंधेरे में ज्यादा सहज करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है तेज रोशनी में उनकी गलतियां भी ज्यादा दिखेंगी। एक अँधेरा कमरा आपके दिमाग और आपके विचारों पर ज्यादा प्रभाव डालता है। शोध रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति अपनी कल्पनाशीलता बढ़ाना चाहता है तो उसे बस खुद को अंधेरे में बैठा महसूस करना चाहिए।

इससे आपके दिमाग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसे ‘प्राइमिंग’ कहा जाता है। ‘प्राइमिंग’ वह क्रिया है जब कोई व्यक्ति किसी विचार को अपने दिमाग में दोबारा याद करके लाता है। लेकिन इस रिसर्च एक और जरुरी बात समाने आईं हैं। कम रोशनी में विचार तो बहुत उत्कृष्ट आतें हैं लेकिन उन्हें जमीनी रूप देना हो तो उसके लिए कम रोशनी अच्छी नहीं।

 

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