जानलेवा भारत बंद : दलितों के विरोध में जल उठा पूरा देश – 14 लोगों की मौत, कौन है जिम्मेदार?

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नई दिल्ली। कल भारत बंद था, या ये कहें कि जानलेवा भारत बंद था। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश में दलित समुदाय द्वारा प्रदर्शन किया गया। यही नहीं, इस प्रदर्शन ने कई जगहों पर हिंसक रूप धारण कर लिया जिसमें कई मासूमों की मौत तक हो गई। भारत बंद का असर देश के 12 राज्यों में देखा गया। देशभर में इस पूरी हिंसा में करीब 14 लोगों की मौत हो गई।

जानलेवा भारत बंद

कई राज्यों में हुई हिंसा

मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश में हिंसक झड़प हुईं। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 7, यूपी और बिहार में तीन-तीन, वहीं राजस्थान में एक की मौत हो गई। उधर, पंजाब में बंद के चलते सीबीएसई की परीक्षाएं टाल दी गई हैं। वहीं, राजनीतिक पार्टियों ने भी इस मुद्दे पर राजनीति शुरू कर दी। कांग्रेस समेत बड़े विपक्षी दलों ने उसके आंदोलन को समर्थन दिया। भाजपा के सबसे ज्यादा 67 सांसद इसी वर्ग से हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शांति बनाए रखने की अपील की

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शांति बनाए रखने तथा कानून व्यवस्था नहीं बिगाड़ने की अपील की क्योंकि आजमगढ़ समेत कई जिलों से हिंसा की खबरें आयी हैं। आजमगढ़ में प्रदर्शनकारियों ने राज्य परिवहन की दो बसें जला दीं जिससे कई यात्री घायल हो गये। वहीं, मेरठ में उग्र भीड़ ने एक थाने को आग लगा दी थी। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी प्रदर्शनकारी कई स्थानों पर पटरियों पर आ गए और देहरादून एक्सप्रेस और रांची राजधानी सहित कई ट्रेनों को रोक दिया।

क्या है पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं। यह सुनवाई महाराष्ट्र के एक मामले में हुई थी। ये गाइडलाइंस फौरन लागू हो गई थीं। सरकारी कर्मी के लिए – तुरंत गिरफ्तारी नहीं। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी। आम लोगों के लिए – एक्ट के तहत आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी। संगठनों की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करे। जो नियम पहले थे, वे यथावत लागू हों।

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