इंदु मल्होत्रा ने रचा इतिहास, पहली बार सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज के तौर पर होंगी नियुक्त

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नई दिल्ली। सीनियर एडवोकेट इंदु मलहोत्रा ने भारत के न्यायिक क्षेत्र में एक इतिहास रचा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इंदू मल्होत्रा और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ को शीर्ष अदालत में बतौर न्यायाधीश नियुक्त किये जाने की सिफारिश की है। अगर वरिष्ठ एडवोकेट इंदु मल्होत्रा के नाम को सरकार हरी झंडी दे देती है तो वे पहली ऐसी महिला वकील होंगी जो सीधे सुप्रीम कोर्ट के जज की कुर्सी तक पहुंचेंगी। इसके अलावा इंदू देश की पहली महिला वकील भी होंगी जो सर्वोच्च न्यायालय में सीधे जज बनेंगी।

इंदु मल्होत्रा और के.एम जोसफ का नाम बतौर न्यायाधीश नियुक्त किये जाने की सिफारिश की है

इंदु मल्होत्रा 2007 में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित की गई थीं। किसी हाईकोर्ट की जज से सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर पदोन्नत होने की बजाय, शीर्ष अदालत में वकालत के बाद सीधे तौर पर न्यायाधीश नियुक्त होने वाली वह प्रथम महिला वकील होंगी। जानकारी के मुताबिक कॉलेजियम में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने अन्य जजों के साथ मिलकर इन दो नामों का चयन किया है।

गौरतलब है कि जस्टिस के एम जोसफ ने ही हाईकोर्ट में रहते हुए 21 अप्रैल 2016 को उतराखंड में हरीश रावत की सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को रद्द किया था। आपको बता दें कि मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में तय 31 जज के पदों में से फिलहाल 25 जज हैं, अभी भी 6 जजों के पद खाली हैं।

इंदु मलहोत्रा 30 सालों से सुप्रीम कोर्ट में प्राइक्टिस कर रही हैं

स्कूलिंग के बाद इंदु मलहोत्रा ने दिल्ली के प्रसिद्ध लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक व मास्टर की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने कुछ दिनों तक मिरांडा हाउस कॉलेज व विवेकानंद कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस पढ़ाया भी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से 1079 से 1982 के दौरान वकालत की पढाई पूरी की। 1983 में दिल्ली बार काउंसिल की सदस्य बनीं और वे पिछले 30 सालों से सुप्रीम कोर्ट में प्राइक्टिस कर रही हैं।

एक वरिष्ठ वकील के रूप में वे विधि संबंधित सरकार की कुछ समितियों से भी जुड़ी रहीं हैं और अपनी शानदार उपलब्धियों के लिए कई सम्मान भी पा चुकी हैं। उन्होंने पुस्तक भी लिखी है।

 

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