यरूशलम में अमेरिकी दूतावास खुलने के बाद हिंसा, 55 फिलीस्तीनियों की मौत, 2,771 घायल

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जेरूसलम| अमेरिका सोमावर को अपना दूतावास तेल अवीव से स्थानांतरित कर यरूशलम में खोल दिया, जिसे लेकर फिलिस्तीनी लोग इजरायली सैनिकों से भिड़ गए। इस दौरान जमकर गोलाबारी हुई। इस संघर्ष में 55 फिलीस्तीनियों की मौत हो गई जबकि 2,771 घायल हो गए।

इजरायली

इजरायल सुरक्षाबलों ने कहा कि गाजापट्टी सुरक्षा बाड़ से सटे 13 स्थानों पर फिलीस्तीन के 40,000 लोगों ने इस हिंसक दंगों में हिस्सा लिया। यह हिंसा जेरूसलम में अमेरिकी दूतावास के उद्घाटन के मद्देनजर हुई, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप, उनके दामाद जेयर्ड कुश्नर और वित्त मंत्री स्टीवन नुचिन के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था।

बीबीसी के मुताबिक, इजरायली पुलिस और गुस्साए प्रदर्शनकारियों के बीच में हिंसक झड़प हुई। प्रदर्शनकारिरयों ने नए दूतावास के बाहर फिलीस्तीन के झंडे लहराए। इस दौरान कोई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी ले लिया गया।

इस दौरान गाजा सीमा पर प्रदर्शन कर रहे फिलिस्तीनी लोग इजरायली बलों से भिड़ गए। इसमें 55 लोग मारे गए लगभग 2400 अन्य घायल हुए हैं। घायल हुए लोगों में कम से कम 200 लोग18 साल से कम उम्र के तथा 11 पत्रकार शामिल हैं। फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और इजरायली सैनिकों पर पथराव किया।

वहीँ इजरायली रक्षाबलों (आईडीएफ) ने एक बयान जारी कर हमास पर ‘‘आतंकी अभियान का नेतृत्व करने’’ और लोगों को भड़काने का आरोप लगाया। आईडीएफ ने कहा कि लगभग 35 हजार ‘‘हिंसक दंगाई’’ गाजा और इजरायल के बीच सीमा पर लगी बाड़ के पास 12 स्थानों पर एकत्र हुए तथा सीमा से लगभग एक किलोमीटर दूर एक तंबू शहर में हजारों और लोग एकत्र हुए।

इजरायल का आरोप है कि उनके सैनिकों पर देशी बम से हमला किया गया। उन्होंने इस दिन को सबसे भयावह कत्लेआम का दिन बताया।

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