रोस्टर मामले पर जस्टिस चेलमेश्वर ने सुनवाई से किया इंकार, कहा- देश खुद फैसला करेगा

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नई दिल्ली। देश में जजों के बीच चल रहा टकराव खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब रोस्टर मामले पर जस्टिस चेलमेश्वर ने सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं नहीं चाहता कि मेरा दिया फैसला 24 घंटों में बदल दिया जाए। मैं दो महीनों में रिटायर हो रहा हूं। अब देश खुद ही फैसला कर लेगा।
उन्होंने कहा कि मेरे बारे में कहा जा रहा है कि मैं किसी ऑफिस को हथियाने के लिए यह सब कर रहा हूं। अगर किसी को चिंता नहीं है तो मैं भी चिंता नहीं करुंगा। जस्टिस ने कहा कि देश के इतिहास को देखते हुए मैं इस मामले को नहीं सुनूंगा। चीफ जस्टिस के मास्टर ऑफ रोस्टर के खिलाफ शांतिभूषण ने यह याचिका दाखिल की थी।

जस्टिस कुरियन ने भी लिखा चीफ जस्टिस को पत्र
इससे पहले जस्टिस कुरियन ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर चेताया है कि इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने कोलेजियम मामले पर सरकार की चुप्पी पर कोर्ट द्वारा कोई ठोस कदम उठाने को जरुरी बताया है। उन्होंने मामले पर चीफ जस्टिस को लिखे अपने पत्र में कहा कि इस मसले की सात वरिष्ठ जजों की बेंच द्वारा सुनवाई की जानी चाहिए।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक जस्टिस कुरियन ने चीफ जिस्टिस को लिखे अपने पत्र में कोलेजियम मामले का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि कोलेजियम द्वारा एक जज व एक वरिष्ठ वकील को तरक्की का लालच देकर सुप्रीम कोर्ट में लाने की सिफारिश वाली रिपोर्ट सरकार दबाकर बैठी है।

उन्होंने आगे लिखा कि देश की अदालत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि तीन महीने बाद भी पता नहीं चल पा रहा है कि आखिर उस सिफारिश का क्या हुआ।

कुरियन के अनुसार अगर सरकार की इस चुप्पी पर कोर्ट ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो, इतिहास हमे कभी माफ नहीं करेगा। कुरियन ने अपने इस लेटर की कॉपी सुप्रीम कोर्ट के 22 अन्य जजों को भी भेजी है।

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