कर्नाटक छोड़िए, इस राज्‍य से आए चुनाव के परिणाम देखकर आप भी रह जाएंगे दंग

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कर्नाटकलखनऊ। इन दिनों कर्नाटक में सियासी तूफान अपने चरम पर है। दरअसल यहां किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलना इस तूफान का कारण बना हुआ है। एक तरफ जहां 104 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी बीजेपी किसी भी तरीके से सरकार बनाने पर अड़ी हुई है तो वहीं दूसरी ओर 78 सीटों वाली कांग्रेस ने 38 सीटों वाली जेडीएस को सरकार बनाने का तगड़ा ऑफर दे दिया। वहीं जेडीएस अब कांग्रेस के गठबंधन के साथ सरकार बनाने पर तैयार है।

आपको बता दें कि कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले यूपी से एक और चुनाव के परिणाम आए थे, लेकिन कर्नाटक की लहर में ये परिणाम दब के रह गए। एक तरफ जहां कर्नाटक में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, तो वहीं दूसरी ओर यूपी के इस चुनाव से भी बीजेपी के लिए बड़ी खबर आई। यूपी में बीजेपी ने 37 में से 36 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है। यह सीटें यूपी में सहकारी बैंकों के प्रबंधन समिति की हैं, जहां सपा का एकक्षत्र राज चलता रहा है।

दरअसल शुक्रवार को यूपी में सहकारी बैंकों के प्रबंधन समिति का चुनाव हुआ था। जिस पर एकतरफा भाजपा ने जीत दर्ज की है। बीजेपी ने यूपी के 37 जिलों में 36 जिला सहकारी बैंकों की प्रबंध प्रबंध समिति के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। जबकि आजमगढ़ में चुनाव स्थगित हो गया था जिसके कारण वहां कमल नहीं खिल सका। यह जीत इसलिए मायने रखती है क्योंकि हाल ही में फूलपुर और गोरखपुर के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी और बसपा के गठबंधन से एक नया सियासी समीकरण बना था।

इससे बीजेपी को पार पाने के लिए नई रणनीति बनानी थी और उसी नई रणनीति के साथ बीजेपी ने विपक्षी दलों को पटखनी दी है। यूपी जिला सहकारी बैंक प्रबंधन समिति के चुनाव में कई जगहों पर तो भाजपा प्रत्याशियों को टक्कर ही नहीं मिली और वह सीधे निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। जबकि जिन स्थानों पर चुनाव हुआ, वहां भी बीजेपी ने जीत हासिल की। इलाहाबाद में बीजेपी नेता अमरनाथ मौर्य ने निर्विरोध जीत हासिल की, जबकि लखनऊ जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन दिनेश तिवारी बने व फैजाबाद में जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन पद पर भाजपा प्रत्याशी धर्मेंद्र प्रताप सिंह निर्विरोध चुने गए हैं।

इसके अलावा प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, चित्रकूट, सुल्तानपुर महोबा, हमीरपुर समेत कुल 36 जिलों में कमल खिला है। बता दें कि यूपी जिला सहकारी बैंक प्रबंधन समिति पर अधिकांश तौर पर सपा और बची खुची सीटी पर बसपा राज करती रही है। लेकिन यह पहली बार है जब भाजपा ने इस चुनाव के लिए पूरी चुनावी रणनीति बनाई और जमीन पर उतरकर जीत का समीकरण तैयार किया।

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