जानें क्यों राहुल गांधी के लिए बेहद खास है कर्नाटक विधानसभा चुनाव, आज नेताओं करेंगे मुलाकात

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नई दिल्ली। गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद अब बीजेपी और कांग्रेस की नजर कर्नाटक पर है।  इस चुनाव के लिए दोनों पार्टियों ने अपनी-अपनी कमर कस ली है। गुजरात और हिमाचल हारने के बाद कांग्रेस कर्नाटक को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहती है। इसलिए वो अपनी नई रणीनीति बनाने में जुट चुकी है। इसी कड़ी में आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नई दिल्ली में कर्नाटक के कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करेंगे। कयास लगाये जा रहें हैं कि इस मुलाकात के दौरान कर्नाटक विधानसभा चुनाव की प्लानिंग पर चर्चा की जाएगी। 

आपको बता दें कि हाल ही में राहुल गांधी बहरीन यात्रा पर गए थे। वहां उन्होंने बीजेपी पर जमकर हमला बोला था।  वहीँ राजनितिक जानकारों का कहना है राहुल की बहरीन यात्रा कर्नाटक चुनाव के लिय्रे बेहद अहम है। क्योंकि खाड़ी देशों में 30 लाख से ज्यादा भारतीय या इसी मूल के लोग रहते हैं जिनमें ज्यादातर कर्नाटक या केरल के रहने वाले हैं। इनका आज भी अपने-अपने राज्यों में अच्छा खासा प्रभाव है।

राहुल के लिए क्यों अहम है कर्नाटक चुनाव

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद वर्ष 2018 में 8 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। इनमे बड़े राज्य कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। इनमे से तीन पर बीजेपी की सत्ता है। अब राहुल गांधी इसप पर नजर बनाये हुए हैं। दो राज्य मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगातार 15 साल से बीजेपी की सत्ता रही है। राहुल गांधी के लिए यहाँ से बीजेपी को हटाना कोई आसन काम नहीं होगा। जबकि अब कर्नाटक पर देश की नजरें टिकी हुयी हैं।    

कर्नाटक में मोदी बनाम राहुल

कर्नाटक राहुल गांधी और बीजेपी दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जहां बीजेपी का लक्ष्य कांग्रेस मुक्त भारत की दिशा में एक और कदम बढ़ाने का होगा तो वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए दोबारा कुर्सी हासिल करने की जंग होगी। गुजरात चुनाव परिणाम से कांग्रेस में काफी जोश है। वहीं बीजेपी अब इसे अपना मेन टारगेट मानकर अधिकार करने की भरपूर कोशिश करेगी। दोनों पार्टियां गुजरात में चुनाव की घोषणा से पहले से ही कर्नाटक में प्रचार अभियान शुरू कर चुकी हैं। कर्नाटक में भी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की संभावना है। कर्नाटक पहला दक्षिण भारतीय राज्य है जहां बीजेपी ने भगवा झंडा फहराया था। तब येदियुरप्पा ने सीएम पद की कमान संभाली थी। हालांकि उन पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगा, उन्हें सीएम पद से हटाया गया और फिर वह पार्टी से अलग हो गए। लेकिन कुछ साल बाद उन्होंने फिर बीजेपी में वापसी की है और अब उन्हें बीजेपी ने सीएम पद का उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है।

कांग्रेस की नैया पार लगाएंगे सिद्धारमैया

वहीं कांग्रेस के सीएम सिद्धारमैया की बात करें तो जनता के बीच उनकी काफी साफ़ सुथरी छवि है। सूत्रों की माने तो अगर उनके हाथ में कांग्रेस की सत्ता रहे तो एक बार फिर कुर्सी पर इनका अधिकार हो सकता है। सीएम सिद्धारमैया का कहना है, ‘हमारी पार्टी गुजरात में हार गई लेकिन फिर भी कड़ी चुनौती देकर जीत हासिल की है। यह कांग्रेस अध्यक्ष पद पर निर्वाचित राहुल की विजय यात्रा का पहला चरण है। कर्नाटक में भी हमारी जीत निश्चित है और यह राहुल को हमारी तरफ से गिफ्ट होगा।’ सिद्धारमैया के सामने अब कांग्रेस के इस गढ़ को बचाने की चुनौती है। ये एकमात्र बड़ा राज्य है जहां कांग्रेस ने मोदी लहर के बावजूद सत्ता कायम रखी। बीजेपी ने गुजरात तो जीत लिया मगर 2018 की राह आसान नहीं होगी

‘मोदी मैजिक’ की काट ‘सिद्धारमैया’

इस समय कर्नाटक में 224 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के पास 127 सीटें हैं। तो जाहिर सी बात है कांग्रेस को जनता पर पूरा भरोसा है और जनता भी कांग्रेस की सत्ता से संतुष्ट है। यहाँ के लोगों का मानना है कि मोदी मैजिक के बाद भी कांग्रेस सत्ता में आएगी। सीएम सिद्धारमैया सोशल मीडिया पर भी बेहद ऐक्टिव हैं इस प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल वह अपनी सरकार की उपलब्धियों को भुनाने में करते हैं। सूत्रों की माने तो यहाँ भी बीजेपी अपना हिंदुत्व वाला कार्ड खेल सकती है। जबकि वह हिंदुत्व का जवाब कन्नड़ भाषा अस्मिता के जरिए देना चाहते हैं। कर्नाटक के अलग झंडे पर वह अपनी बात खुलकर रख चुके हैं। इसके साथ ही कांग्रेस अपना विकास कार्ड खेलने को तैयार है। गुजरात चुनाव से सबक सिखते हुए वो कोइ ऐसा काम नहीं करना चाहती जिसके जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो।इसके अलावा सिद्धारमैया राज्य में महादयी और कावेरी जल विवाद से किसानों की स्थिति के लिए भी लगातार मोदी सरकार को कसूरवार ठहरा रहे हैं। सिद्धारमैया ने सूबे के मुस्लमान वोटरों पर भी टीपू सुल्तान जयंती मनाकर पकड़ बना रखी है। तो यहाँ कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत है।

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