कठुआ गैंगरेप: आखिर क्यों साम्प्रदायिक नफरत का शिकार हुई आसिफा का परिवार भी हुआ लापता..

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श्रीनगर। आसिफा एक 8 साल की छोटी मासूम बच्ची जिसे शायद अभी तक कोई समझ नहीं थी। 10 जनवरी 2018 को कठुआ से अचानक लापता हो जाती है। 12 जनवरी को उसके पिता थाने में अपनी मासूम सी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराते हैं। जिसके बाद 17 जनवरी को मिलती जरुर है लेकिन मृत। जंगल में मिली लाश को देखने के बाद सबके मन में बस एक सवाल आखिर हुआ क्या और क्यों ? बस कुछ ही मिनट बीते की पता चला गए कि एक मासूम ज्यादा दिन कुछ हैवानों की हैवानियत से बच नहीं पाई।

बच्ची के साथ हुए गैंगरेप से पूरा देश गुस्से में है। सबको अपने सवाल का जवाब चाहिए कि आखिर क्यों.. क्या यह अपना ही देश है.. जहां एक ओर सब न्याय की मांग कर रहे। जस्टिस फॉर आसिफा को लेकर मार्च निकालकर वहीं दूसरी ओर खबर आती है कि आसिफा के घरवाले गायब हो गए।

कठुआ के रसाना गांव में रहने वाला असिफा का परिवार कहीं चला गया है। उसके घर में ताला लगा हुआ है। किसी को नहीं पता कि आखिर असिफा का परिवार कहा गया। कहा जा रहा है कि हुई वारदात से आसिफा का परिवार बहुत डरा हुआ है। इसीलिए शायद वहीं कही चला गया है।

हाल ही में एक मीडिया से बातचीत के दौरान आसिफा के पिता ने कहा कि ‘उन्हें बदला लेना ही था तो वे किसी और से लेते, एक निर्दोष बच्ची ने क्या बिगाड़ा था। उसे यह भी नहीं पता था कि मेरा दायां हाथ कौन है और बायां हाथ कौन-सा है, कभी उसने ये नहीं समझा कि हिंदू क्या होता है और मुसलमान क्या होता है।’

खबरों की माने तो कठुआ से बकरवाल समुदाय को भगाने के लिए उस मासूम को शिकार बनाया गया। फ्ती सरकार ने 23 जनवरी को पूरे मामले को जम्मू कश्मीर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया। क्राइम ब्रांच ने एसआईटी बनाई और जांच के बाद 9 अप्रैल को 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की। इस मामले में सभी आठ लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। 15 पन्नों की चार्जशीट के मुताबिक पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड मंदिर का पुजारी संजी राम है।

मिली जानकारी के मुताबिक रसाना गांव में हिन्दु की संख्या की ज्यादा है। यहां बकरवाल समुदाय के लोग भी रहते हैं। जो मूल रूप से खानाबदोश हैं और भेड़-बकरियों को चराने का काम करते हैं। वे गांव में आते-जाते रहे हैं लेकिन पिछले कुछ सालों से समुदाय के कुछ लोगों ने यहां जमीनें खरीद लीं और पक्के मकान बना लिए। गैंगरेप का शिकार हुई बच्ची का घर भी पक्का था लेकिन यही एक बात वहीं पर रह रहे दूसरे समुदाय के लोगों को पसंद नहीं आई और उन लोगों ने लगातार इस बात का विरोध भी करना शुरु कर दिया।

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