रंगों का त्योहार होली की मस्ती के बीच इन बातों का भी रखें खास ख्याल

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नई दिल्ली| रंगों का त्योहार आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। हालाँकि इसकी तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। लेकिन रंगों के इस त्योहार में सावधानी न बरती जाए तो आपके लिए मुसीबत भी बन सकती है इसलिए जरुरी है कि जश्न के इस माहौल में क्या आप सुरक्षित और सेहतमंद और इको फ्रेंडली होली की तैयारी में जुटे हैं? अगर ऐसा तो इससे बढ़िया कोई बात नहीं। तो थोड़ी सी सावधानी से अप अपने होली को सुरक्षित बना सकते हैं।

रंगों का त्योहार

त्वचा की समस्याएं : होली के रंगों में संभावित हानिकारक केमिकल्स से त्वचा की समस्याएं होने से स्वास्थ्य को बहुत बड़ा खतरा होता है। इनसे खुजली, लालिमा, सूखापन, स्केलिंग, जलन का एहसास और फुंसियां हो सकती हैं। होली के रंगों का प्रभाव बालों पर भी पड़ सकता है। कई लोगों को होली के बाद बालों का झड़ना, सिर की त्वचा पर खुजली, गंजापन, बालों का बेजान और रूखा होने जैसी समस्याओं का सामान करना पड़ता है।

स्वास्थ्य से जुड़े संभावित जोखिम में सबसे पहले है एलर्जी : होली के रंग अक्सर केमिकल से बनाए जाते हैं और इनसे कुछ लोगों को ऐलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। एलर्जी से त्वचा, आंखों, नाक और गले में जलन हो सकती है। इनसे संवेदनशील लोगों में सर्दी, खांसी और सांस की तकलीफें भी हो सकती हैं। इनसे दमा और अन्य जटिल समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।

आंखों की समस्याएं : होली के जश्न के बाद लोगों में पाई जाने वाली आम समस्याएं आंखों से जुड़ी होती हैं, जिनमें जलन, खुजली, आंखों में अधिक पानी आना, रोशनी के प्रति अधिक संवेदनशीलता, आंखों में दर्द या लाल होने के लक्षण शामिल होते हैं।

पाचन संबंधी समस्याएं : होली के उल्लास में रंग लगे हाथों से पकवान खाने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। रंग म्यूकस मेम्ब्रेन (श्लेष्म झिल्ली) में जलन पैदा कर सकते हैं, जिस कारण आपको मिचली, उल्टी या पेट की तकलीफ हो सकती है, साथ ही इंफेक्शन होने की संभावना भी बनी रहती है।

केमिकल का उपयोग : रंगों का त्योहार होली के रंगों में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों से आपके स्वास्थ्य के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इससे पक्षाघात (पैरालिसिस), गुर्दे की खराबी और त्वचा के कैंसर जैसी समस्याएं जुड़ी हैं इसलिए सावधान रहें।

आजकल हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) रंग बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन इन पर भी कोई नियमन नहीं है, इसलिए आपको भ्रामक लेबल से सावधान रहने की जरूरत है। नकली ऑर्गेनिक या झूठा दावा करने वाले उत्पादों से सावधान रहें, सुरक्षित रंगों को पहचानने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं।

रंगों का त्योहार  के कोशंदर बनाने के लिए गों से यदि केमिकल या पेट्रोल की गंध आए तो उन्हें न खरीदें। यदि रंग पानी में घुलता नहीं है तो उनमें केमिकल हो सकता है, बेहतर होगा उन्हें न खरीदें।

ऑर्गेनिक रंगों में चमकदार कण नहीं होते हैं और वे गहरे रंगों (डार्क शेड) में उपलब्ध नहीं होते हैं। इसलिए सिल्वर, गहरा पर्पल या काला रंग न खरीदें, हो सकता है कि वे प्राकृतिक रंग न हों।

सुरक्षित होली के लिए इन सलाह पर अमल करें : होली में रंगों से खेलने से पहले मॉइचराइजिंग लोशन, जैतून (ऑलिव) या नारियल का तेल त्वचा पर लगा लें। इससे आपकी त्वचा सुरक्षित भी रहती है और बाद में रंग छुड़ाना भी आसान हो जाता है। आप एक वॉटरप्रूफ सनस्क्रीन लोशन का भी प्रयोग कर सकते हैं। यदि आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं तो होली खेलने से पहले उन्हें निकालकर कर रख दें।

होली के रंगों से आपके बाल और सिर की त्वचा खराब हो सकती है, इसलिए रंगों से खेलने से पहले आप सिर और बालों में तेल लगा सकते हैं या कैप (टोपी) पहनकर उन्हें सुरक्षित रख सकते हैं। केवल जैविक (ऑर्गेनिक) तरीके से बनाए रंगों का ही प्रयोग करें, सबसे अच्छे हैं प्राकृतिक सामग्रियों से बने रंग।

रंगों का त्योहार मनाने के बाद अपने आपको साधारण पानी और साबुन से साफ करें। कठोर साबुन, डिटर्जेंट या अन्य केमिकल का उपयोग करने से बचें, इनसे भी त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। चेहरे की चमक दोबारा पाने के लिए शहद के साथ नींबू का रस मिलाकर प्रयोग करें या बेसन, हल्दी और दही का एक प्राकृतिक फेस पैक बनाकर लगाएं।

 

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