चमोली में प्रकृति ने बरपाया कहर, पहाड़ दरकने ने मच गई तबाही, बेघर हुए लोग

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चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के कुंवारी गांव में बिना बारिश के ही जबरदस्त भूस्खलन हो गया। पहाड़ी से विशाल चट्टान और पेड़ उखाड़कर खाई में समा गए। गांव जाने वाला रास्ता भी मलबे में दब गया। गांव ग्रामीणों ने गांव छोड़ दिया है। गांव के करीब 50 लोग पास के एक मंदिर में शरण लिए हुए हैं। प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच कर राहत कार्य में जुटी है।

घटना रात करीब 10 बजे की है है। देवाल ब्लाक के झलिया गांव के पास वाली पहाड़ी से तेज़ गडग़ड़हाट से घबरा कर लोग घर से बाहर निकल आए। इतनी देर में मलबा पहाड़ी के पास बने दो मकानों को तोड़ता हुआ दस अन्य मकानों में घुस गया।

इस घटना से पूरा गांव रात भर दहशत में रहा। सुबह होने पर गांव के एक व्यक्ति ने घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दी। गांव में भूस्खलन की सूचना पर कपकोट के उपजिलाधिकारी रवींद्र सिंह बिष्ट ने एसडीआरएफ की सात सदस्यीय टीम कुंवारी गांव भेज दी। जिस क्षेत्र में भूस्खलन हुआ है उस हिस्से के खतरे में आने के कारण वहां से पहले ही सभी परिवारों को गांव के दूसरे सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जा चुका है।

जिले का कुंवारी गांव अतिसंवेदनशील गांवों की सूची में शामिल है। इस गांव में लगभग 64 परिवार रहते हैं। एक दशक पूर्व से इस गांव में जबरदस्त भूस्खलन हो रहा है। गांव के आगे से जमीन दरकने और पीछे की पहाड़ी से लगातार भूस्खलन के कारण वर्ष 2014 में गांव को पूरी तरह से दूसरे सुरक्षित भाग में विस्थापित कर दिया गया। इसके लिए गांव के प्रत्येक परिवार को धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। कुंवारी गांव उत्तराखंड राज्य में पूर्ण विस्थापित होने वाला पहला गांव है।

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