खेतों को छोड़कर सड़कों पर उमड़ा 40 हजार किसानों का सैलाब, बीजेपी सरकार में मचा हड़कंप

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मुंबई। पूर्ण कर्जमाफी समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर मुंबई की सड़कों पर करीब 40 हजार किसानों का सैलाब उमड़ आया है। अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में 6 मार्च को नासिक से निकला किसानों का ये हुजूम अब मुंबई के आजाद मैदान में पहुंच गया है। सरकार से नाराज यह किसान आज विधानसभा का घेराव करने वाले हैं। इतनी बड़ी संख्या में किसानों के सड़कों पर उतर आने से बीजेपी सरकार में हड़कंप मचा गया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज करेंगे किसानों से मुलाकात

किसान मोर्चे से घबराई सरकार अब इनसे बातचीत करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक सीएम देवेंद्र फडणवीस आज दोपहर दो बजे किसानों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करेंगे। इस बातचीत के बाद किसान अपना अगला कदम उठाएंगे। फडणवीस ने कहा है कि सरकार उनसे बात करेगी और उनके मुद्दों को सुलझाएगी। सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक है।

उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों पर चर्चा के लिए हमने मंत्रियों की एक समिति बनाई है। हमने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया है। किसान इस बार किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है। उनका कहना है कि सरकार जब तक उन्हें लिखित में आश्वासन नहीं देती तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। वो मुंबई में विधानसभा का घेराव हर हालत में करके रहेंगे।

किसानों के इस आंदोलन से आम जनता को कोई परेशानी न हो वो इसकी पूरी कोशिश कर रहे हैं। आज से मुंबई में 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरु हो रही हैं। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किसानों ने रात को चलना शुरु कर दिया था। जिस वजह से आज सुबह वो आजाद मैदान पहुंच सके।

उनका मकसद शहर में किसी तरह के ट्रैफिक जाम की स्थित उत्पन्न करना नहीं था। क्योंकि इससे छात्रों को परीक्षास्थल पर पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता। 11 बजे इनकी परीक्षा समाप्त होने पर किसान विधानसभा का घेराव करने निकलेंगे।

जानिए आखिर क्या हैं किसानों की मांगें

किसानों का कहना है कि उन्हें कृषि उपज की लागत मूल्य के अलावा 50 प्रतिशत लाभ दिया जाए। इसके अलावा सभी किसानों के कर्ज माफ किए जाएं। वो चाहते हैं कि नदी जोड़ योजना के तहत महाराष्ट्र के किसानों को पानी दिया जाए। उनका कहना है कि वन्य जमीन पर पीढ़ियों से खेती करते आ रहे किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाए। इसके अलावा संजय गांधी निराधार योजना का लाभ उन्हें दिया जाए। उनकी सहायता राशि 600 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह की जाए। किसानों की मांग है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

किसानों का मानना है कि सरकार उनके विकास के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में असफल रही है। किसानों का कहना है कि सरकार को हाईवे और बुलेट ट्रेन जैसे विकास कार्यों के नाम पर किसानों की जमीन हड़पना बंद करना चाहिए।

किसानों को मिला अन्य राजनीतिक दलों का समर्थन

इस बीच किसानों को अन्य दलों का राजनीतिक समर्थन मिलता दिख रहा है। रविवार को जहां शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने किसानों से मुलाकात कर उन्हें अपना समर्थन दिया। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने भी उन्हें इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।

किसान मोर्चे को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने समर्थन देने का ऐलान किया है। एनसीपी चीफ शरद पवार ने तो पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे और विधान परिषद में नेता विपक्ष धनंजय मुंडे को पार्टी की तरफ से मोर्चे में शामिल होने को कहा है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण और शेकाप के जयंत पाटील ने किसानों को समर्थन देने की घोषणा की है।

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