फिल्म रिव्यू : बुर्के से बाहर आई लिपस्टिक, दिखे कई रंग

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फिल्म का नाम: ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’

स्टार कास्ट: रत्ना पाठक शाह, प्लाबिता बोरठाकुर, कोंकणा सेन शर्मा , अहाना कुमरा, सुशांत सिंह, विक्रांत मास्सी, शशांक अरोड़ा

डायरेक्टर: अलंकृता श्रीवास्तव

रेटिंग: 3.5 स्टार

‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ फिल्म रिव्यू

'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का'

मुंबई। इस साल में अब तक की सबसे कॉन्ट्रोवर्शियल फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ आज रिलीज़ हो गई है। फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड और मेकर्स के बीच विवाद के चलते इसे भारत में हरी झंडी नहीं मिल पाई थी लेकिन तमाम मशक्कत और कई कट्स के बाद आखिरकार फिल्म रिलीज़ हो ही गई। अलंकृता श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित ये फिल्म चार महिलाओं की जिंदगी पर आधारित है जिनकी लाइफ को लेकर अपनी अलग फैंटेसीज़ हैं। अपनी बोल्डनेस के लिए कॉन्ट्रोवर्सीज में आई ये फिल्म लोगों को कितना पसंद आती है, आइये फिल्म की समीक्षा करते हैं।

कहानी

फिल्म की कहानी भोपाल के एक मोहल्ले से शुरु होती है, जहां चार अलग- अलग उम्र की महिलाएं रहती हैं। ऊषा (रत्ना पाठक शाह), शिरीन (कोंकणा सेन), लीला (अहाना कुमरा) और रिहाना (प्लाबिता बोरठाकुर) किसी तरह से अपनी जिंदगी का गुजर- बसर कर रही होती हैं। इन सब में सबसे ज्यादा उम्र की ऊषा को लोग बुआ जी के नाम बुलाते हैं। ये काफी रंगीन मिजाज की होती हैं जिन्हें रोमांटिक उपन्यासों को पढ़ना बहुत पसंद होगा है। वहीं शिरीन अपने पति (सुशांत सिंह) से छुपकर डोर टू डोर सेल्स वुमन का काम करती है। शिरीन को डर होता कि कहीं इस बात से उसका पति नाराज़ न हो जाए इसलिए वो ये काम छिपकर करती हैं।

वहीं लीला फोटोग्राफर अरशद (विक्रांत मास्सी) से बहुत प्यार करती होती हैं, लेकिन अफसोस अरशद को उनमें कोई इंटरेस्ट नहीं होता। नतीजा ये कि लीला के घरवाले उसकी शादी किसी और से साथ तय कर देते हैं। तीनों में सबसे कम उम्र की रिहाना एक कॉलेज गर्ल होती हैं जो आजाद पंछी की तरह उड़ना चाहती हैं, लेकिन उसके घर का माहौल ऐसा नहीं होता। घर में बंदिशों के चलते वो पिता के साथ सिलाई में हाथ बंटाती है लेकिन जब भी उसे मौका मिलता है वो उसका पूरा फायदा उठाती है। अपनी फैंटेसीज़ को दुनिया से छिपकर ये चारों महिलाएं कैसे पूर करती हैं ये देखने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना पड़ेगा।

डायरेक्शन

अलंकृता श्रीवास्तव का डायरेक्शन जबरदस्त है। फिल्म की कहानी काफी सिंपल है लेकिन इसे दिलचस्प तरीके से दिखाया गया है जो आपको बिलकुल बोर नहीं होन देगा। फिल्म में दिखाई छोटी से भी छोटी चीजों पर बहुत ध्यान दिया गया है। लोकेशंस, सिनेमेटोग्राफी और डायलॉग्स सभी पर जमकर मेहनत की है।

एक्टिंग

फिल्म की कास्ट बिल्कुल परफेक्ट है, चारों लीड लेडीज़ ने अच्छा काम किया है। रंगीन मिजाज की बुआ के रोल में रत्ना पाठक ने बेहतरीन काम किया है। कोंकणा सेन शर्मा भी अपने रोल में सटीक बैठी हैं। फिल्म के बाकी स्टार्स ने भी अपना रोल बखूबी निभाया है।

म्यूजिक

फिल्म का म्यूजिक कहानी के हिसाब से मेल खाता है। ‘ले ली जान’ और ‘जिगि- जिगि’ जैसे गानें बीच- बीच में आपको इंटरटेन करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी बढ़िया है।

देखें या नहीं

चार महिलाओं की ये कहानी इंटरटेन करने के साथ समाज को एक अच्छा मैसेज भी देती है। एक्शन-रोमांस के हटकर अगर कुछ हटकर फिल्म देखने का मूड बना रहे हैं तो एक बार जरूर जाएं ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’।

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