‘मेरा मोदी जी से कोई कॉम्पिटीशन नहीं, मैं नहीं चाहता लोग मुझपर तरस खाएं’

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सूरत। कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह शनिवार को गुजरात के सूरत में थे। यहां उन्होंने कई मुद्दों पर बात की। मनमोहन ने कहा कि वह नहीं चाहते कि लोग उनकी ‘गरीबी की पृष्ठभूमि’ पर तरस खाएं और इसे लेकर वह अपने उत्तराधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं करना चाहते। इसके साथ ही उन्होंने जीडीपी पर भी बयान दिया। उन्होंने जुलाई-सितंबर तिमाही की 6.3 फीसदी वृद्धि दर का स्वागत किया है लेकिन चेतावनी भी दी है कि अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है।

मोदी से कोई तुलना नहीं

सिंह से पूछा गया कि वह अपनी गरीबी की पृष्ठभूमि के बारे में बात क्यों नहीं करते हैं, जिस तरह मोदी हमेशा बचपन में अपने परिवार की मदद के लिए गुजरात के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने की बात करते हैं। उन्होंने इसपर ये बात बोली। 2004-14 के दौरान संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की अगुवाई कर चुके मनमोहन सिंह अविभाजित पंजाब के गाह गांव में 1932 में पैदा हुए थे। पूर्व प्रधानमंत्री एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे।

उनका परिवार 1947 में विभाजन के दौरान भारत के अमृतसर आ गया

अपने जीवन के शुरुआती 12 सालों तक वह गाह में ही रहे, जिस गांव में न बिजली थी, न स्कूल था, न अस्पताल था और न ही पाइपलाइन से आपूर्ति किया जानेवाला पानी ही था। सिंह के मीडिया सलाहकार के रूप में 2004 से 2008 तक काम कर चुके संजय बारू के मुताबिक, मनमोहन सिंह स्कूल जाने के लिए रोज मीलों चलते थे और रात में केरोसिन तेल की ढिबरी (बत्ती) की मंद रोशनी में पढ़ाई किया करते थे। उनका परिवार 1947 में विभाजन के दौरान भारत के अमृतसर आ गया।

ऐसी रही जीडीपी ग्रोथ

बता दें वित्त वर्ष 2017 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.9 फीसद पर थी जो तिमाही आधार पर गिरते गिरते वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में 5.7 के स्तर पर आ गई थी। इसकी मुख्य वजह नोटबंदी और जीएसटी की अनिश्चितता रही। दूसरी तिमाही में ग्रोथ रेट में गिरावट का सिलसिला थमा और विकास दर 6.3 फीसद रही।

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