फिल्म रिव्यू : ‘डैडी’ देखने जा रहे हैं तो सिर दर्द की दवा साथ ले जाना न भूलें

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फिल्म का नाम :  ‘डैडी’

निर्देशक : आशिम अहलूवालिया

स्टार कास्ट : अर्जुन रामपाल, राजेश श्रिंगारपुरे, निशिकांत कामत, ऐश्वर्या राजेश, आनंद इनागले, फरहान अख्तर

रेटिंग : 2 स्टार

कहानी 

फिल्म मुंबई की दगड़ी चॉल में रहने वाले अरुण गुलाब गवली की जिंगदी के बारे में है। जो एक मिल में काम करने वाले का बेटा होता है। लेकिन गरीबी और परिस्थितयों से परेशान होकर गवली बुरे रास्ते पर निकल पड़ता है। फिर एक दिन उसके हाथों एक मर्डर हो जाता है और वो सिलसिला जारी रहता है। धीरे- धीरे गवली एक डॉन बन जाता है। लोग उसके नाम से थर-थर कांपते हैं। लेकिन गवली में एक अच्छी बात ये होती है कि वो गरीब और मजबूर लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।  गवली का उदय ही उसे दाऊद इब्राहिम का दुश्मन बना देता है। दोनों एक दूसरे की जान के दुश्मन होते हैं। दोनों के बीच चूहे- बिल्ली का खेल चलता रहता है। इसके बाद गैंगस्टर गवली एक पॉलिटिशियन ‘डैडी’ बन जाता है। क्यों, कब, कैसे ये जानने के लिए आपको सिनेमाघरों तक जाना पड़ेगा।

डायरेक्शन

फिल्म का डायरेक्शन ठीक- ठाक है। हालांकि कहानी में कोई नयापन नहीं है। फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे याद रखा जा सके। कहानी एकदम सामान्य है और फ़िल्म कोई भी थ्रिल पैदा नहीं करती है। स्क्रीनप्ले में कुछ भी चौंकाने वाला नहीं है। गवली इंडियन क्राइम हिस्ट्री का एक बड़ा नाम रहा है इसे और बेहतर तरीके से फिल्माया जा सकता था।

एक्टिंग

अर्जुन रामपाल ने खुद को गवली के रूप में बहुत अच्छी तरह से ढ़ाला है। लुक और एक्टिंग दोनों तरह से अर्जुन गवली के रोल में बिलकुल फिट बैठे हैं। दाउद का किरदार में फरहान अख्तर ने भी बेहतरीन काम किया है। पुलिस के रोल में विजयकर नितिन (निशिकांत) का सहज और बेहतरीन अभिनय है।

म्यूजिक

फिल्म का म्यूजिक भी कुछ खास नहीं है। बैकग्राउंड स्कोर भी ठीक- ठाक है।

देखें या नहीं

क्राइम फिल्म देखने के शौकीन हैं तो जा सकते हैं।

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