नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना बनाना सेहत के लिए बेहद खतरनाक

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नई दिल्ली। नॉन-स्टिक बर्तनों का आजकल ज्यादा उपयोग किया जाने लगा है। कहा जाता है कि इसमें कम तेल लगता है, खाना जल्दी पकता है, जलता नहीं वगैरा वगैरा। लेकिन क्या आपको पता है कि नॉनस्टिक बर्तनों में खाना पकना आपकी सेहत के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ है। जी हां, एक रिसर्च के मुताबिक नॉन-स्टिक बर्तन आपके खाने में धीमी जहर में तब्दील कर देते हैं।

रिसर्च में ये भी पाया गया है कि जिन महिलाओं में टेफ्लॉन की मात्रा बढ़ जाती है उनकी प्रेग्नेंसी में भी परेशानियां आ सकती हैं। अमेरिका में हुए रिसर्च में यह चौकाने वाला खुलास हुआ है। इसकी रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार कई सालों तक नॉन स्टिक बर्तन में खाने से टेफ्लॉन की मात्रा अगर ज्यादा बढ़ जाए तो लीवर की बीमारियां भी हो सकता हैं।

इस बर्तन में खाना बनाने बनाने से आयरन की कमी हो सकती है जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। नॉन-स्टिक पैंस  में टेफ्लॉन की कोटिंग होती है, इसकी वजह से थायराइड का रिस्क बढ़ता है। शरीर की इम्‍यून सिस्टम को नॉनस्टिक में बना भोजन बहुत कमजोर बना देता है। नॉन-स्टिक बर्तन से निकलने वाला परफ्लूरिनेटेड कम्पाउंड (पीएफओए) शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। इससे शरीर में तरह-तरह की बीमारियां होने लगती हैं।

नॉनस्टिक बर्तन में अधिक पका हुआ खाना ऐसे तत्व रिलीज करता है, जिसकी मात्रा शरीर में अधिक होने पर कैंसर जैसी घातक बीमारी भी हो सकती है। इसकी वजह से लीवर भी इफेक्टिव होता है। नॉन स्टिक बर्तनों में खाना बनाते हैं तो पीएफओए की मात्रा बढ़ने से शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल भी बढ़ जाता है।

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