अब पहले की तरह नहीं होगा महाकाल का अभिषेक, सुप्रीम कोर्ट ने बदले नियम

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नई दिल्ली। 12 जोतिर्लिंगों में से एक उज्जैन के महाकाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बड़े ऐलान किए हैं। चढ़ावे से शिवलिंग का आकार छोटा होने को लेकर दायर याचिका पर कोर्ट ने ये आदेश सुनाया है।कोर्ट की तरफ से बनाई गई कमिटी ने बताया है कि पूजा के दौरान महाकाल को चढ़ाई जा रही कुछ चीज़ों से शिवलिंग को नुकसान हो रहा है।

सिर्फ RO के पानी से महाकाल का जलाभिषेक किया जाएगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को कुल मिलाकर निम्नलिखित सुझावों पर अमल करने के लिए कहा है।अब सिर्फ आधा लीटर RO के पानी से महाकाल का जलाभिषेक किया जाएगा। श्रद्धालु 500 मिलीलिटर से ज्यादा जल नहीं चढ़ा पाएंगे। अभिषेक के लिए हर श्रद्धालु को निश्चित मात्रा में दूध या पंचामृत चढ़ाने की इजाज़त होगी।

आदेश दिया है कि भस्म आरती से पहले शिवलिंग शिवलिंग पर सूती कपड़ा डाला जाए। पांच बजे जलाभिषेक खत्म होने के बाद पूरे गर्भगृह को सुखाया जाएगा। शिवलिंग पर चीनी पाउडर लगाने की इजाज़त नहीं होगी, बल्कि खांडसारी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पुजारियों के अलावा बाकी लोगों को गर्भ गृह में न जाने दिया जाए। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो लोगों की संख्या सीमित कर दी जाए।

बता दें, महाकाल उज्जैन में सुबह पंचामृत से अभिषेक होता है। फिर जलाभिषेक और भस्म आरती। रात तक 4 बार अभिषेक होता है। श्रद्धालु दिनभर में कई बार पंचामृत चढ़ाते हैं और भांग से श्रृंगार होता है।

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