शुक्रवार के दिन सकट चौथ का है विशेष महत्व, इस तरह करेंगी पूजा तो मिलेगा दोगुना लाभ

0

नई दिल्ली।  पांच जनवरी यानि आज भगवान गणेश का सबसे उत्तम फल देनेवाला व्रत संकष्टी चतुर्थी पूरा देश धूमधाम से मना रहा है। ये त्योहार माघ मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। आज के दि विशेष रूप से भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है और चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। आइये जानते हैं क्यों मनाया जाता है ये त्योहार और क्या है इसकी पूजा करने की विधि।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व

संकष्टी चतुर्थी पर स्त्रियां अपने बच्चों की तरक्की के लिए पूजन करती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से गणपति सभी कार्यक्षेत्र में आनेवाले सभी संकटों को हर लेते हैं। यह व्रत स्त्रियां अपने संतान की दीर्घायु और सफलता के लिये करती है। इस व्रत के प्रभाव से संतान को ऋद्धि व सिद्धि की प्राप्ति होती है, और उनके जीवन की सभी विघ्न बाधायें गणेश जी दूर कर देते हैं।

व्रत की विधि

सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके गणेश जी की पूजा आरंभ करें। उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भगवान गणेश को अर्ध्य देना चाहिए। नदी घर के आसपास हो तो 21 बार जल चढ़ाएं, घर पर ही पूजा कर रहे हों तो एक बार जल चढ़ा सकते हैं। पूजा में भगवान को गुड़, तिल, गन्ने, शकरकंद, अमरूद और मूली का भोग चढ़ाना चाहिए। गणेश जी को दूब, बेलपत्र और शमी के पत्ते में रखकर तिल के लड्डू चढ़ाएं तो व्रत का पूरा फल मिलेगा। पूजा स्थल पर कलश में जल भरकर धूप-दूप अर्पित करें। चौथ के दिन चढ़ी हुई मूली या मूली की सब्जी खाना वर्जित है, इससे आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है। बहुत से लोग इस दिन शाम की पूजा तक निर्जला व्रत करते हैं। व्रत का पारण तिल का प्रसाद खाकर किया जाता है।

विशेष- इस बार संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार को है। यह माता लक्ष्मी का दिन होता है। इसलिए इस बार लक्ष्मी और गणपति का पूजन साथ करें। लक्ष्मी माता को लाल गुलाब चढ़ाएं और खीर या मखाने अर्पित करें। धन की देवी प्रसन्न होकर समृद्धि देंगी।

 

 

loading...
शेयर करें