कल गंगा स्नान करने से धुल जाएंगे सारे पाप, जानिए कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और पूजा विधि

0

नई दिल्ली। 4 नवंबर, शनिवार को कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाएगा। हिंदू धर्म के लिए ही नहीं, सिखों के लिए भी कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा, महाकार्तिकी या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है।

कार्तिक का महीना बहुत ही पवित्र माना जाता है। विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा का दिन बेहद शुभ माना जाता है। इ्स दिन स्नान और दान का बड़ा महत्व है। इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।

इस तरह से करें पूजा 

इस दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। जल में चावल और लाल फूल भी डालें। इसके बाद घर के मुख्यद्वार पर अपने हाथों से आम के पत्तों का तोरण बनाकर बांधे।
सरसों का तेल, तिल, काले वस्त्र आदि किसी जरूरतमंद को दान करें और शाम को तुलसी के पास दीपक जलाएं और उनकी परिक्रमा करें।

इस दिन ब्राह्मण के साथ ही अपनी बहन, बहन के लड़के, यानी भान्जे, बुआ के बेटे, मामा को भी दान स्वरूप कुछ देना चाहिए। चंद्रोदय के समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी का आशीर्वाद मिलता है।

इस दिन का क्या है महत्व

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। इसी दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था। राक्षस के अंत के बाद महादेव की पूजा त्रिपुरारी के रूप में होने लगी। लेकिन कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व वैष्णव भक्तों के लिए है क्योंकि प्रलयकाल में कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु ने पहला अवतर लिया था जिसे मत्स्य अवतार के नाम से जाना जाता है।

सिखों के लिए ये दिन क्यों है खास

कार्तिक पूर्णिमा के दिन को प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इसी दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। इस दिन सिख सम्प्रदाय के अनुयाई सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताए रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं। इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है।

loading...
शेयर करें

आपकी राय