ये है दुनिया की सबसे ठंडी जगह, जहां -71.2 तक पहुंच जाता है तापमान, होता है 3 घंटे का दिन

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नई दिल्ली। इन दिनों अपने देश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। हम सभी सोच रहें है कि कब ये ठंड जाएगी। वैसे हमारे देश में चार महीने ही ठंड का मौसम होता है और उसमे से एक महीने ही जोरदार ठंड पड़ती है। लेकिन क्या आपको पता है दुनिया की सबसे ठंडी जगह कौन सी है। उसका नाम है ओइमाकॉन है। रूस के साइबेरिया में बर्फ की घाटी में बसा एक छोटा सा गांव।

दिलचस्प बात ये है कि यहां सिर्फ 3 घंटे ही दिन निकलता है और इस शहर के नाम में खास बात ये है कि ओइमाकॉन का मतलब होता है जहां पानी न जमता हो लेकिन हकीकत उससे कोसो दूर है, यहां तो इन्सान ही जम जाए। 500 लोग की आबादी वाला यह गांव रूस की राजधानी मास्को से पूरब की तरफ 3000 मील दूर स्थित है। हर तरफ सिर्फ सफ़ेद बर्फ की चादर ही नजर आती है। बर्फ की वजह से जमीन सख्त हो जाती है उसे नर्म करने के लिए आग जलाई जाती है।  मरने वालों को भी कब्र नसीब होने में तीन दिन लग जाते हैं।

पहले धीरे-धीरे गड्ढा खोदा जाता है फिर उसमे कोयला भरा जाता है ताकि वो बर्फ की वजह से भर न सके। लोग 20-20 मिनट की शिफ्ट में काम करते हैं क्योंकि इससे ज्यादा वक्त तक काम करने पर जिस्म का हाड़-मांस जमकर बर्फ बन सकता है। यहां ज्यादा बाहर रहना जान के लिए खतरनाक हो सकता है।

यहां जनवरी के महीने में औसतन तापमान माइनस 50 डिग्री के आसपास बना रहता है। यहां पर सबसे कम तापमान -71.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। यहां कभी कभी तो सूरज की रोशनी नजर आजाती है लेकिन उसकी गर्मी लोगों तक नहीं पहुँच पाती क्योंकि बर्फ उन्हें पहुंचने नहीं देती। सर्दी के मौसम में यहां दिन में मुश्किल से सिर्फ तीन घंटे रोशनी होती है। बाकी के वक्त यहाँ अंधेरा छाया रहता है। जबकि, गर्मी के मौसम में दिन के 21 घंटे रोशनी होती है, सिर्फ तीन घंटों के लिए ही रात होती है।

टैंकर यहां रोजाना पानी को एक ब्यॉलर प्लांट में पहुंचाते हैं, जहां पर पानी को गर्म कर गांव के घरों तक इसे सप्लाई किया जाता है। ब्यॉलर को चौबीसों घंटे जलाए रखना पड़ता है। अगर एक बार आग ठंडी हो गयी तो समझो जिंदगी ही बैठ गयी। यहां गाड़ियों को हमेशा स्टार्ट ही रखा जाता है क्योंकि एक बार बंद हो जाती हैं वो दोबारा स्टार्ट नहीं होती हैं।

 

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