रिव्यू : राजपूतों की शान है ‘पद्मावत’, फिल्म देखकर विरोधी भी हो जाएंगे भंसाली के फैन

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फिल्म : पद्मावत’ 

कलाकार : दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, शाहिद कपूर, अदिति राव हैदरी

निर्देशक : संजय लीला भंसाली

अवधि : 2 घंटा 44 मिनट

रेटिंग : 4 स्टार

नई दिल्ली। संजय लीला भंसाली की सबसे विवादित फिल्म ‘पद्मावत’ आखिरी आज देश के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। फिल्म की शूटिंग से लेकर रिलीज होने तक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती से ‘पद्मावत’ हो गई। पूरे देश में करणी सेना ने इस फिल्म का विरोध किया। लेकिन अगर विरोधी भी ये फिल्म देख लें तो यकीन मानिए वो भी भंसली के फैन हो जाएंगे। फिल्म में राजपूतों की आन-बान और शान के बारे में दिखाया गया है। फिल्म देखकर हर राजपूत का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। ये एक ऐसी फिल्म है जिसकी सिनेमेटोग्राफी, स्‍क्रीन राइटिंग, डायलॉग्‍स और साउंड सब लाजवाब है। फिल्म में युद्ध के सीन को बखूबी फिल्माया है।

कहानी

‘सारा मसला ख्वाहिशों का है…’ और ‘दुनिया की हर नायाब चीज पर सिर्फ अलाउद्दीन का हक है’….ऐसे ही डायलॉग्‍स के साथ ये फिल्म शुरू होती है। अलाउद्दीन खिलजी अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी (रजा मुराद ) की बेटी से मेहरूनिशां (अदिति राव हैदरी) से निकाह करता है जलालुद्दीन खिलजी सल्‍तनत से बगावत कर दिल्ली का तख्‍त कब्‍जा लेता है।

उधर, सत्‍ता की भूख रखने वाला अलाउद्दीन चाचा की हत्या कर गद्दी पर बैठता है। वहीं महारावल रतन सिंह सिंहल मोती की खोज में सिंघल राज्‍य पहुंचते हैं और राजकुमारी पद्मावती से प्रेम कर बैठते हैं इसके बाद वो पद्मावती को अपनी दूसरी रानी बना कर चित्तौड़ ले आते हैं। महारावल के गुरु राघव चैतन्‍य पद्मावती पर आसक्त हो जाते हैं और राजा-रानी के अंतरंग दृश्‍यों को छिपकर देखते हैं। इसके बाद शुरू होती है वो जंग जो पद्मावती के जौहर के साथ खत्म होती है।

इस फिल्म में खिलजी-महारावल-पद्मावती के बीच की राजनीतिक खींचतान को जिस तरह दिखाया गया है वो कमाल है। रानी की अक्लमंदी का बेजोड़ नमूना तब दिखता है जब रानी अपने राजा को खिलजी की कैद से छुड़ाने के लिए कुछ शर्त रखती है और खिलजी उनकी सारी शर्तें मान लेता है। और वहीं पर आधी जंग पद्मावती जीत लेती हैं।

फिल्म का संगीत

संजय लीला भंसाली ने अपनी हर फिल्म की तरह ‘पद्मावत’ में भी संगीत से जान डाल दी है। इस फिल्म के दो गाने ‘घूमर’ और ‘एक तू है’ पहले ही काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। इसके अलावा इस फिल्म के चार गाने हाल ही में रिलीज हुए थे। भंसाली ने फिल्मी पर्दे पर इन गानों को बेहद शाही अंदाज में पेश किया है, ज्यादातर गाने दीपिका और शाहिद पर ही फिल्माए गए हैं।

एक्टिंग

करीब 200 करोड़ की लागत से बनी ‘‘पद्मावत’’ अब तक की सबसे महंगी फिल्म बताई जाती है। फिल्म के हर सीन में सिर से पांव तक ढकीं दीपिका पादुकोण ने अपने चेहरे के हाव भाव और खासतौर से आंखों के जरिए जो दमदार अभिनय किया है। शाहिद कपूर ने महाराजा रावल रतन सिंह के किरदार के साथ न्याय किया है। वह शुरू से अंत तक शालीन नजर आए। लेकिन एक किरदार जो पूरी फिल्म को अपने कब्जे में करता है वह हैं अलाउद्दीन खिलजी यानी रणवीर सिंह का। रणवीर असल जिंदगी में भी जिस कदर एनर्जी से भरपूर हैं। शुरू से अंत तक एक सनकी, विलासी, व्यभिचारी और कुंठित मानसिकता जैसे लक्षणों को जीवंत करने में रणवीर ने जान लड़ा दी है।

फिल्म क्यों देखें और क्यों नहीं –

इस फिल्‍म का देखने का सबसे बड़ा कारण तो ये है कि पूरे देश में जिसका इनता विरोध हुआ, उस फिल्म को देखना तो बनता है। विरोध करने वाले जिसे लेकर आपत्ति जता रहे थो, फिल्म में ऐसा कुछ है ही नहीं। खिलजी-पद्मावती के बीच फिल्म में कोई सीन नहीं है। फिल्म में खिलजी और पद्मावती के बीच न तो कोई ड्रीम सीक्वेंस है और न ही कोई किसिंग सीन। न इस फिल्म में इतिहास को तोड़ा मोड़ा गया है और न ही कुछ अलग से जोड़ा गया है। यह फिल्म देखने के बाद कुछ घंटों तक आप उसी के बारे में सोचते रहेंगे। भंसाली की दिलचस्प कहानी कहने की कला की तारीफ किए बिना आप रह नहीं पाएंगे। साथ ही फिल्म न देखने का कोई मुख्य कारण नहीं है। 2 घंटे 45 मिनट की इस फिल्म को थोड़ा काटा जा सकता था। फिल्म जरूरत से ज्यादा खिंची हुई लगती है। फिल्म ‘पद्मावत’ को कम से कम एक बार तो देखा ही जा सकता है।

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